भोपाल के जेपी नगर स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर का शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निरीक्षण किया। यह दौरा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि गैस त्रासदी के चार दशक बाद पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने फैक्ट्री परिसर में जाकर हालात का प्रत्यक्ष जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने गैस राहत से जुड़े अधिकारियों से विस्तार से चर्चा की और अब तक किए गए कार्यों की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों के दौर में वर्षों तक जहरीला कचरा फैक्ट्री में ही पड़ा रहा, लेकिन उनकी सरकार ने अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए पिछले साल इस कचरे का निष्पादन कराया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कोर्ट के मार्गदर्शन में यह तय किया जाएगा कि इस स्थान पर मेमोरियल समेत कौन-कौन से विकास कार्य किए जा सकते हैं। सभी पक्षों को विश्वास में लेकर इस जगह को उपयोगी और सुरक्षित बनाया जाएगा।
यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस दौरान कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि गैस त्रासदी कांग्रेस के शासनकाल में हुई और फैक्ट्री के मालिक वॉरेन एंडरसन को देश से बाहर जाने में तत्कालीन सत्ता से जुड़े लोगों ने ही मदद की थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरे मामले पर राहुल गांधी को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि उनकी दादी और पिता के कार्यकाल में यह त्रासदी एक कलंक के रूप में बनी रही। उन्होंने यह भी कहा कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान भी इस स्थल के लिए ठोस प्रयास नहीं किए गए।
रोजगार और शहर विकास की बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार बंद पड़ी फैक्ट्रियों को नए सिरे से उपयोग में लाकर रोजगार के अवसर तलाश रही है। भोपाल को मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है और जहां भी अड़चनें हैं, उन्हें दूर किया जा रहा है। उनका कहना था कि सरकार गैस पीड़ितों के साथ खड़ी है, जबकि पिछली सरकारों ने उन्हें लंबे समय तक अनदेखा किया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज भोपाल में यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड फैक्ट्री परिसर का निरीक्षण किया।
इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परिसर में पूर्व से विद्यमान रासायनिक अपशिष्ट का माननीय न्यायालय के मार्गदर्शन एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप निष्पादन किया जा चुका… pic.twitter.com/sDX2luzhRu
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) January 17, 2026
85 एकड़ जमीन के उपयोग पर मंथन
निरीक्षण के दौरान फैक्ट्री परिसर की करीब 85 एकड़ जमीन के भविष्य को लेकर भी चर्चा हुई। बताया गया कि जिला प्रशासन और गैस राहत विभाग जमीन से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा कर रहे हैं। पुलिस विभाग ने भी डीआरपी लाइन के लिए इस जमीन का एक हिस्सा मांगा है, जिस पर आगे निर्णय लिया जाएगा।
दूसरी ओर, गैस पीड़ित संगठन मुख्यमंत्री से मुलाकात करना चाहते थे, लेकिन यह मुलाकात नहीं हो सकी। संगठन की रचना ढिंगरा ने बताया कि कई महिलाओं को अब तक एक हजार रुपये मासिक पेंशन नहीं मिल रही है। इसके अलावा पुनर्वास और स्वास्थ्य से जुड़ी राज्य स्तरीय समिति की बैठक पिछले 11 वर्षों से नहीं हुई है। इन मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद थी, लेकिन निराशा हाथ लगी।
