IAS Santosh Verma : मध्य प्रदेश में विवादों में घिरे IAS संतोष वर्मा के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। बुधवार देर रात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में वर्मा की IAS सेवा समाप्त करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने का निर्णय लिया गया। इसी के साथ उन्हें तुरंत प्रभाव से कृषि विभाग से हटाकर सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के पूल में भेज दिया गया है, जहां उनके पास न विभाग रहेगा और न ही कोई जिम्मेदारी।
जवाब लगा असंतोषजनक
GAD की विस्तृत रिपोर्ट में वर्मा पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। विभाग के मुताबिक उन्होंने जाली आदेश और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके IAS पद पर पदोन्नति ली। इतना ही नहीं, उनके खिलाफ कई आपराधिक प्रकरण अलग-अलग अदालतों में लंबित हैं। जांच में यह भी पता चला कि संनिष्ठा प्रमाण पत्र उन्होंने गलत दस्तावेजों के आधार पर हासिल किया। विभागीय जांच लगभग अंतिम चरण में है और वर्मा द्वारा भेजा गया जवाब सरकार को असंतोषजनक लगा। मुख्यमंत्री का कहना है कि ऐसे अधिकारी को सेवा में रखना प्रशासनिक अनुशासन और कानूनी व्यवस्था के खिलाफ है।

विवादित बयानों ने बढ़ाई परेशानी
वर्मा पिछले कुछ हफ्तों से अपने बयानों की वजह से भी चर्चा में थे। उनके विवादित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही कई समुदायों में नाराजगी बढ़ गई थी। पहला विवाद उस बयान से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने कहा कि जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं देता, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। वहीं, दूसरे वीडियो में उन्होंने हाईकोर्ट पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि एसटी वर्ग के बच्चों को सिविल जज कोई और नहीं, हाईकोर्ट नहीं बनने दे रहा… कटऑफ मार्क्स जानबूझकर कम दिए जाते हैं। इन बयानों के बाद कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए और वर्मा के पुतले तक फूंके गए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संतोष वर्मा प्रकरण पर लिया संज्ञान
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जीएडी को दिये सख्त कारवाई के निर्देश
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मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश के परिपालन में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा लिये गये निर्णयRM : https://t.co/VUeW8QlZ17@DrMohanYadav51 @GADdeptmp #MadhyaPradesh… pic.twitter.com/PBqwISMItr
— Jansampark MP (@JansamparkMP) December 11, 2025
14 दिसंबर को होने वाला था प्रदर्शन
IAS वर्मा पर कार्रवाई ना होने से नाराज ब्राह्मण समाज और अन्य समुदायों ने 14 दिसंबर को मुख्यमंत्री निवास घेराव की घोषणा कर दी थी। कांग्रेस और बीजेपी के कार्यकर्ता भी विभिन्न मंचों से विरोध में जुटे हुए थे। प्रदेश भर में धरना, प्रदर्शन और पुतला दहन हो रहे थे, जिसके चलते सरकार पर कार्रवाई का दबाव लगातार बढ़ रहा था। ऐसे माहौल में सरकार ने वर्मा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाते हुए केंद्र को बर्खास्तगी का प्रस्ताव भेज दिया है। अब अगला निर्णय केंद्र सरकार को लेना है।
