,

MP जनजातीय संग्रहालय में गौंड कला की रंगत, कुम्हार सिंह धुर्वे की चित्र प्रदर्शनी 28 फरवरी तक

Author Picture
Published On: 28 February 2026

राजधानी भोपाल स्थित MP जनजातीय संग्रहालय में इन दिनों जनजातीय चित्र प्रदर्शनी कला प्रेमियों को आकर्षित कर रही है। यह प्रदर्शनी 28 फरवरी तक आम दर्शकों के लिए खुली रहेगी। संग्रहालय प्रबंधन के अनुसार प्रदर्शनी का उद्देश्य प्रदेश की पारंपरिक जनजातीय कला को व्यापक पहचान दिलाना है।

प्रदर्शनी में गौंड चित्रकार कुम्हार सिंह धुर्वे की कृतियां प्रदर्शित की गई हैं, जो बिक्री के लिए भी उपलब्ध हैं। धुर्वे की पेंटिंग्स में पारंपरिक गौंड शैली की बारीक रेखाएं, जीवंत रंग और प्रकृति से गहरा जुड़ाव साफ दिखाई देता है। उनके चित्रों में पशु-पक्षियों की चंचलता, घने जंगलों की रहस्यमयी छटा और पहाड़ी जीवन की सहजता को खूबसूरती से उकेरा गया है।

MP जनजातीय संग्रहालय

डिंडौरी जिले के पाटनगढ़ गांव से आने वाले धुर्वे की कला में स्थानीय जीवन की गहरी छाप है। पाटनगढ़ को गौंड चित्रकला की समृद्ध परंपरा के लिए जाना जाता है। धुर्वे के चित्रों में ग्रामीण परिवेश, लोककथाएं और प्रकृति के तत्व एक साथ दिखाई देते हैं, जो दर्शकों को जनजातीय संस्कृति से रूबरू कराते हैं।

खेती से कला तक का सफर

खेती-किसानी से जुड़े धुर्वे ने चित्रकला की शुरुआत अपने बच्चों के साथ की। परिवार के साथ सीखते-सीखते उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। सीमित संसाधनों के बावजूद कला के प्रति समर्पण ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया कि आज उनकी कृतियां राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में स्थान पा रही हैं।

कला प्रेमियों के लिए खास अवसर

संग्रहालय में लगाई गई यह प्रदर्शनी कला प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए खास अवसर है। यहां न सिर्फ चित्रों को करीब से देखने का मौका मिलता है, बल्कि जनजातीय जीवन और संस्कृति की बारीकियों को समझने का भी अवसर मिलता है। आयोजकों ने लोगों से अपील की है कि वे 28 फरवरी से पहले प्रदर्शनी का अवलोकन कर प्रदेश की पारंपरिक कला को प्रोत्साहित करें।

Related News
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp