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एयर इंडिया की मनमानी पर आयोग का सख्त फैसला, भोपाल उपभोक्ता आयोग ने ठहराया जिम्मेदार

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Published On: 24 December 2025

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, भोपाल (क्रमांक-1) ने एयर इंडिया लिमिटेड के खिलाफ सुनाए गए फैसले में साफ कर दिया कि यात्रियों के साथ मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आयोग ने माना कि एयरलाइन की ओर से सेवा में गंभीर कमी हुई है। इसी आधार पर एयर इंडिया को आदेश दिया गया है कि वह यात्री के खाते से काटे गए 3,200 फ्रीक्वेंट फ्लायर अंक लौटाए और इसके साथ ही हर्जाना भी अदा करे।

आयोग के आदेश के अनुसार एयर इंडिया को मानसिक प्रताड़ना के लिए 10 हजार रुपए और वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपए अलग से देने होंगे। अगर यह राशि दो महीने के भीतर नहीं चुकाई गई, तो परिवाद दायर करने की तारीख से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी जोड़कर भुगतान करना होगा। यह फैसला दिसंबर के पहले सप्ताह में सुनाया गया।

क्या है पूरा मामला?

यह प्रकरण भोपाल निवासी सुरेंद्र उपाध्याय से जुड़ा है, जो एयर इंडिया की फ्रीक्वेंट फ्लायर योजना के सदस्य हैं। उन्होंने अपने अर्जित अंकों का उपयोग करते हुए 14 मार्च 2021 को दिल्ली से भोपाल के लिए 6 मई 2021 की फ्लाइट का अवॉर्ड टिकट बुक किया था। यात्रा से पहले सब कुछ सामान्य था, लेकिन बाद में स्थिति बदलती चली गई। परिवादी के अनुसार, एयर इंडिया ने पहले 21 अप्रैल को ई-मेल भेजकर यात्रा की तारीख 6 मई से बदलकर 7 मई कर दी। इसके बाद 30 अप्रैल को फिर एक ई-मेल आया, जिसमें यात्रा की तारीख 8 मई कर दी गई। लगातार बदलाव से यात्री असमंजस में आ गया और उसकी यात्रा योजना पूरी तरह बिगड़ गई।

टिकट रद्द, लेकिन अंक वापस नहीं

बार-बार तारीख बदलने से परेशान होकर सुरेंद्र उपाध्याय ने 2 मई 2021 को ई-मेल के जरिए टिकट निरस्त कर पूरे अंक लौटाने की मांग की। उनका कहना था कि एयर इंडिया के नियमों के मुताबिक यदि फ्लाइट शेड्यूल में बदलाव होता है, तो बिना किसी पेनल्टी के पूरा रिफंड मिलना चाहिए। इसके बावजूद न तो समय पर जवाब दिया गया और न ही पूरे अंक लौटाए गए, बल्कि करीब 3,200 अंक पेनल्टी के तौर पर काट लिए गए।

‘नो-शो’ बताकर किया इंकार

काफी समय बाद अप्रैल 2022 में एयर इंडिया की ओर से जवाब आया, जिसमें टिकट को “नो-शो” मानते हुए रिफंड से साफ इनकार कर दिया गया। इस रवैये से आहत होकर परिवादी ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग के समक्ष नोटिस तामील होने के बावजूद एयर इंडिया की ओर से न तो कोई जवाब दिया गया और न ही दस्तावेज पेश किए गए। इसके चलते मामले की एकपक्षीय सुनवाई हुई। आयोग की सदस्या डॉ. प्रतिभा पाण्डेय ने आदेश में कहा कि यात्रा की तिथि बार-बार बदलना एयरलाइन की जिम्मेदारी थी और इसी वजह से यात्री को टिकट निरस्त करना पड़ा। ऐसे में अंक न लौटाना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथा है।

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