MP में भाजपा सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर कांग्रेस ने सरकार के कामकाज को कटघरे में खड़ा किया। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता में पूर्व नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धन सिंह और आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने सरकार के कार्यकाल को “नगरीय अव्यवस्था, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और स्वास्थ्य संकट” का प्रतीक बताया। दोनों नेताओं ने कहा कि सरकार की उपलब्धियां कागजों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी हकीकत आम जनता के लिए लगातार मुश्किलें बढ़ा रही है।
नगरीय विकास पर सवाल
जयवर्धन सिंह ने नगरीय विकास की स्थिति पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में शहरों का विकास ठप हो गया है। न नगर निकायों को मजबूत किया गया और न ही दीर्घकालिक योजनाओं पर काम हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के बड़े शहरों में अब तक मास्टर प्लान तक पेश नहीं किया जा सका, जबकि कांग्रेस शासन में यह प्रक्रिया समय पर होती रही। भोपाल और इंदौर जैसे शहरों में विकास की जगह अव्यवस्था हावी है।
पुल और डिजाइन की खामियां
उन्होंने भोपाल के सुभाष नगर फ्लाईओवर का उदाहरण देते हुए कहा कि 90 डिग्री का शार्प मोड़ इंजीनियरिंग मानकों का खुला उल्लंघन है। उद्घाटन के बाद से दर्जनों हादसे हो चुके हैं, फिर भी जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई। रायसेन जिले में पुल निर्माण के दौरान ढह जाने की घटनाओं को उन्होंने घटिया निर्माण और कमीशनखोरी का नतीजा बताया।
जयवर्धन सिंह ने भोपाल और इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हजारों करोड़ की लागत वाली मेट्रो में पिलर्स की ऊंचाई इतनी कम रखी गई कि भारी वाहन नहीं निकल पा रहे। अब सुधार के नाम पर फिर से सड़कें खोदी जा रही हैं, जिससे अतिरिक्त खर्च और जलभराव की समस्या बढ़ रही है। उज्जैन की लैंड पूलिंग योजना को भी उन्होंने किसानों के साथ अन्याय बताया, जिसे बाद में सरकार को वापस लेना पड़ा।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर आरोप
विक्रांत भूरिया ने पत्रकार वार्ता में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने सतना में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को HIV संक्रमित खून चढ़ाए जाने के मामले को दुर्घटना नहीं, अपराध बताया। उनका कहना था कि यह सीधा सिस्टम फेल्योर है, जिसमें ब्लड बैंक की जांच प्रक्रिया और निगरानी पूरी तरह विफल रही। भूरिया ने कहा कि प्रभावित बच्चे गरीब परिवारों से हैं और अब उन्हें जीवनभर इलाज, सामाजिक भेदभाव और आर्थिक बोझ झेलना पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को मार्च-अप्रैल में ही मामले की जानकारी मिल गई थी, लेकिन इसे महीनों तक दबाकर रखा गया। उन्होंने छिंदवाड़ा में कफ सिरप से मौत और इंदौर अस्पताल की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यह लापरवाही का एक पैटर्न है।
कांग्रेस की मांगें
कांग्रेस नेताओं ने सरकार से मांग की कि ब्लड बैंक और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए और आपराधिक मामला दर्ज हो। पीड़ित बच्चों को जीवनभर मुफ्त इलाज और मुआवजा दिया जाए। साथ ही पुल, मेट्रो और अन्य निर्माण कार्यों में दोषी ठेकेदारों और इंजीनियरों से नुकसान की भरपाई कर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए। पत्रकार वार्ता के अंत में कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या सरकार किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है। नेताओं ने साफ कहा कि विज्ञापन और प्रचार से प्रदेश नहीं चलता, जनता को सुरक्षित शहर, ईमानदार सिस्टम और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं चाहिए।
