MP कांग्रेस कमेटी ने राज्य के बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में चल रही विकास परियोजनाओं पर कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी का कहना है कि शहरीकरण की तेजी का असर अब शहरों की सांसों तक पहुंच गया है। कांग्रेस नेता अभिनव बरोलिया ने आरोप लगाया कि सड़क चौड़ीकरण, फ्लाईओवर और मेट्रो प्रोजेक्ट जैसे काम जनहित की आड़ में कुछ चुनिंदा ठेकेदारों और नेताओं के हित साधने के लिए किए जा रहे हैं। कांग्रेस ने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में विकास परियोजनाओं के नाम पर लाखों पेड़ों को काटा गया है। पेड़ ट्रांसप्लांटेशन का ढोल पीटा गया, लेकिन हकीकत में ज्यादातर पेड़ बच ही नहीं पाए। बरोलिया का आरोप है कि 90% पेड़ या तो कट गए या स्थानांतरण के बाद सूख चुके हैं।
पेड़ों के तेज़ी से गायब होने से शहरों की हरियाली लगभग खत्म होती जा रही है। कांग्रेस ने चेताया कि भोपाल और अन्य शहरों का AQI पहले ही ‘खराब’ स्तर पर है और आने वाले समय में हालत और बिगड़ सकती है।
मेट्रो परियोजनाओं की उपयोगिता पर सवाल
मेट्रो रेल पर भी कांग्रेस ने तीखा रुख दिखाया। पार्टी का कहना है कि मेट्रो केवल उन महानगरों में कारगर होती है जहां जनसंख्या घनत्व 50 हजार प्रति वर्ग किलोमीटर से ज्यादा हो और रोजाना लाखों लोग सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते हों। भोपाल और इंदौर जैसे शहरों में यह स्थितियां नहीं हैं। ऐसे में मेट्रो को महंगी और अव्यावहारिक परियोजना बताते हुए कांग्रेस का तर्क है कि इसका खर्च जनता की जेब पर भारी पड़ेगा और निर्माण के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था और बदतर होने का खतरा रहेगा। पार्टी ने याद दिलाया कि पहले से चल रही BRTS योजना का हाल सबके सामने है, ऐसे में मेट्रो पर खरबों रुपए खर्च करना समझ से परे है।
कांग्रेस की मांगें
कांग्रेस ने राज्य सरकार से मांग की है कि वर्तमान और प्रस्तावित सभी मेट्रो परियोजनाओं पर तत्काल रोक लगाई जाए और उनकी तकनीकी व आर्थिक व्यवहार्यता की निष्पक्ष जांच हो।
सड़क चौड़ीकरण और फ्लाईओवर निर्माण के नाम पर पेड़ों की कटाई बंद करने की मांग करते हुए पार्टी ने सुझाव दिया कि यदि पेड़ काटना जरूरी हो तो बदले में 10 नए पेड़ लगाए जाएं और 5 साल तक उनकी देखभाल की जिम्मेदारी तय की जाए। यातायात सुधार के लिए बेहतर बस सेवा, साइकिल ट्रैक, पैदल पथ और इलेक्ट्रिक बसों जैसे कम खर्च वाले और पर्यावरण-अनुकूल उपायों को प्राथमिकता देने की बात भी उठाई गई।
बरोलिया ने कहा कि सच्चा विकास वह है जो जन-केंद्रित हो और पर्यावरण को सुरक्षित रखे। उन्होंने भाजपा सरकार से आग्रह किया कि “जनता और प्रकृति के साथ खिलवाड़ बंद किया जाए” तथा सभी परियोजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
