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MP में मतदाता सूची पुनरीक्षण के बीच अफसरों को हटाने पर कांग्रेस का विरोध, SIR प्रक्रिया पर उठे सवाल

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Published On: 16 December 2025

MP में चल रही मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान जिला कलेक्टरों को प्रशिक्षण के नाम पर कार्यमुक्त करने की तैयारी पर कांग्रेस ने कड़ा एतराज जताया है। पार्टी का कहना है कि यह कदम न केवल प्रशासनिक अस्थिरता पैदा करेगा, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सीधा असर डालेगा। मंगलवार को भोपाल में पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जे.पी. धनोपिया निर्वाचन आयोग कार्यालय पहुंचे। दोनों नेताओं ने आयोग के अधिकारियों से मुलाकात कर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा और राज्य शासन के प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कराई। कांग्रेस ने इसे गंभीर और चिंताजनक फैसला बताया।

अधिकारी की भूमिका

कांग्रेस नेताओं ने बताया कि प्रदेश में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण चल रहा है, जिसका अंतिम प्रकाशन 21 फरवरी 2026 को प्रस्तावित है। इस पूरी प्रक्रिया में जिला कलेक्टर ही जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में काम कर रहे हैं और वे सीधे तौर पर निर्वाचन आयोग के प्रति प्रतिनियुक्त रहते हैं। ऐसे में उनका अचानक हटना या कार्यमुक्त होना प्रक्रिया की निरंतरता को प्रभावित कर सकता है।

24 कलेक्टर हटाने की तैयारी

कांग्रेस का आरोप है कि राज्य सरकार 24 जिला कलेक्टरों को प्रशासनिक प्रशिक्षण के लिए भेजने की तैयारी कर रही है, जबकि वे सभी अधिकारी SIR प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इन अधिकारियों को इस काम के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। उनके स्थान पर नए या अप्रशिक्षित अधिकारियों को जिम्मेदारी देना मतदाता सूची की शुद्धता पर सवाल खड़े करता है।

सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र की आधारशिला है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही या हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जा सकता। वहीं जे.पी. धनोपिया ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग के नियमों के मुताबिक पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी को न हटाया जा सकता है, न स्थानांतरित किया जा सकता है और न ही किसी अन्य अधिकारी को उनका प्रभार सौंपा जा सकता है।

कांग्रेस की स्पष्ट मांगें

कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन तक सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को उनके पद पर यथावत रखा जाए। साथ ही किसी भी तरह का प्रशिक्षण या प्रशासनिक कार्यक्रम SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आयोजित किया जाए। कांग्रेस नेताओं ने निर्वाचन आयोग से इस पूरे मामले में तुरंत दखल देने की अपील की है। पार्टी का कहना है कि समय रहते फैसला नहीं लिया गया, तो मतदाता सूची की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह शासन-प्रशासन की होगी।

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