MP के निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में एनआरआई कोटे से प्रवेश को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने सोमवार को पत्रकारवार्ता में दावा किया कि इस फर्जीवाड़े से हर साल करीब 800 से 1000 करोड़ रुपए की अवैध कमाई हो रही है। आरोप है कि यह सारा खेल शासन, विभागीय अफसरों और निजी कॉलेज प्रबंधन की मिलीभगत से चल रहा है।
कैसे होता है घोटाला?
एनएसयूआई प्रदेश प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने बताया कि कॉलेज और शासन ने मिलकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ा दी हैं। कोर्ट ने साफ कहा था कि केवल नजदीकी रिश्तेदार ही छात्र को स्पॉन्सर कर सकते हैं, लेकिन यहां पैसे लेकर कोई भी व्यक्ति स्पॉन्सर बन जाता है। इतना ही नहीं, फीस भी स्पॉन्सर के खाते से आनी चाहिए, मगर यहां छात्र या उनके माता-पिता ही पैसा भरते हैं। यह साफ इशारा है कि एनआरआई सर्टिफिकेट नकली है।
एनएसयूआई उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि कॉलेज जानबूझकर काउंसलिंग प्रक्रिया में गड़बड़ी करते हैं। बाहर के छात्रों को फर्जी “मूल निवासी प्रमाण पत्र” बनवाकर मोटी रकम लेकर दाखिला दे दिया जाता है। इससे प्रदेश के असली मूल निवासी और मेधावी छात्र-छात्राओं को नुकसान उठाना पड़ता है।
क्लिनिकल ब्रांच पर सबसे ज्यादा खेल
एनएसयूआई नेताओं का कहना है कि पीजी कोर्स में सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा हो रहा है। कॉलेज प्रबंधन एनआरआई सीटें सिर्फ क्लिनिकल ब्रांच जैसे डर्मेटोलॉजी, रेडियोलॉजी, गायनी, मेडिसिन, पीडियाट्रिक्स और जनरल सर्जरी जैसी शाखाओं में ही रखता है। इनकी डिमांड ज्यादा होने से प्रति सीट 3 करोड़ तक वसूले जाते हैं। वहीं नॉन-क्लिनिकल ब्रांच जैसे एनाटॉमी या पैथोलॉजी में एनआरआई सीट ही नहीं रखी जाती।
सुप्रीम कोर्ट की अनदेखी
पत्रकारवार्ता में बताया गया कि 2017 के सुप्रीम कोर्ट आदेश और 2018 के मप्र शासन राजपत्र में साफ लिखा है कि एनआरआई प्रवेश नियमों के मुताबिक ही होंगे। लेकिन मप्र में इनका पालन नहीं हो रहा। कॉलेजों की मनमानी पर रोक लगाने के बजाय विभागीय अधिकारी भी इस अवैध कमाई में हिस्सेदार बन जाते हैं। यही कारण है कि छात्रों की बार-बार की शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
छात्रों का भविष्य दांव पर
जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने कहा कि इस घोटाले की वजह से गरीब और मेधावी छात्र, खासकर SC, ST, OBC और EWS वर्ग के बच्चों को मेडिकल सीटें नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन और विभागीय मंत्री शिक्षा माफियाओं को बचाने में लगे हैं।
एनएसयूआई की मांगें
- अब तक NRI कोटे से हुए सभी प्रवेशों की जांच STF से हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में हो।
- छात्रों के सभी दस्तावेज शासकीय प्रतिनिधियों से सत्यापित कर सार्वजनिक पोर्टल पर डाले जाएं।
- दोषी कॉलेज प्रबंधन और संबंधित अफसरों पर FIR दर्ज की जाए।
- भविष्य के लिए कड़े और पारदर्शी नियम लागू किए जाएं, जैसे महाराष्ट्र और कर्नाटक में हैं।
आंदोलन की चेतावनी
एनएसयूआई नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे छात्र हित में सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेंगे। जरूरत पड़ी तो हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे। पत्रकारवार्ता में विवेक त्रिपाठी, रवि परमार, अक्षय तोमर सहित संगठन के कई पदाधिकारी मौजूद रहे। एनएसयूआई ने साफ कहा कि यह सिर्फ घोटाला नहीं, बल्कि प्रदेश के युवाओं के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। यदि सरकार और विभाग ने तुरंत कदम नहीं उठाए तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
