विमेंस वर्ल्ड कप में भारत को जीत दिलाने वाली छतरपुर की बेटी क्रांति गौड़ अब पूरे प्रदेश का गर्व बन गई हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को घोषणा की कि सरकार क्रांति को एक करोड़ रुपए की सम्मान राशि देगी। उन्होंने कहा कि बेटियों ने देश का नाम रोशन किया है, और क्रांति जैसी खिलाड़ी आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं। सीएम ने कहा कि सरकार खिलाड़ियों को हर संभव सहयोग देगी ताकि वे आगे बढ़ सकें। क्रांति की कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं। उनके पिता मुन्ना सिंह पुलिस विभाग में प्रधान आरक्षक थे, लेकिन 2011 से सस्पेंड चल रहे हैं। परिवार का अपना घर नहीं है, न ही खेती की जमीन। पूरा परिवार दो कमरे के छोटे पुलिस क्वार्टर में रहता है। मां नीलम और पांच भाई-बहनों के बीच क्रांति सबसे छोटी हैं। घर की आर्थिक हालत इतनी कमजोर थी कि कई बार खाने तक की दिक्कत हो जाती थी।
ऐसे हालात में उनके बड़े भाई मयंक ने घर की जिम्मेदारी उठाई। दिल्ली की एक कंपनी में नौकरी कर उन्होंने बहन का सपना जिंदा रखा। क्रिकेट की किट से लेकर मैच फीस तक का खर्च भाई ने उठाया। मां ने भी बेटी के सपनों के लिए अपने गहने तक बेच दिए।
मैदान से शुरू हुआ सफर
क्रांति के घर के सामने ही एक छोटा मैदान है, वहीं से उनका क्रिकेट सफर शुरू हुआ। आठ साल की उम्र में गांव के लड़कों के साथ टेनिस बॉल से खेलना शुरू किया। गांव के लोग पहले हैरान हुए, पर धीरे-धीरे सबने उसका हौसला बढ़ाया। घर के सामने अब भी वही टूटा बिजली का खंभा ‘स्टंप’ बनकर खड़ा है, जहां से भारत की यह उभरती स्टार अपनी गेंदबाजी सुधारती थी।
मध्यप्रदेश की बेटी का सम्मान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन करने वाली प्रदेश की बेटी क्रांति गौड़ को ₹1 करोड़ की सम्मान राशि की घोषणा…@DrMohanYadav51 @BCCIWomen @MP_DSYW #CMMadhyaPradesh #MadhyaPradesh pic.twitter.com/o9vYKSfZXB
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) November 3, 2025
पहला मौका
2017 में एक दिन मौका मिला जब सागर जिले की टीम का एक खिलाड़ी बीमार पड़ गया। क्रांति को बदले में खेलने का मौका दिया गया। उन्होंने इस मौके को हाथों-हाथ लिया। पूरे टूर्नामेंट में 26 रन बनाए और 20 विकेट झटके। मैन ऑफ द मैच बनीं और सबका दिल जीत लिया। यहीं से उनके करियर की दिशा बदल गई। छतरपुर के एक कोच ने उन्हें ट्रेनिंग के लिए बुलाया और फिर क्रांति ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
गांव में जश्न
वर्ल्ड कप जीतने की रात क्रांति के गांव में जश्न का माहौल था। टीवी के सामने बैठकर लोग हर चौके-छक्के पर आतिशबाजी करते रहे। जीत के बाद गांव “चक दे इंडिया” और “भारत माता की जय” के नारों से गूंज उठा। सुबह क्रांति ने मां से वीडियो कॉल पर बात की और कहा, “जो सपना देखा था, वो बहुत जल्दी पूरा हो गया।”
