सागर के बड़तूमा में निर्माणाधीन संत रविदास महाराज मंदिर एवं संग्रहालय का सोमवार को उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया और मंदिर की ड्राइंग देखकर इंजीनियरों से विस्तार से चर्चा की। डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि मंदिर का निर्माण निर्धारित समय-सीमा में पूरा होना चाहिए और गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि मंदिर के पूर्ण होने के बाद देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक सागर आएंगे। यह परियोजना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि जिले के गौरव और पर्यटन के विकास में भी अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने सभी अधिकारियों को समयबद्ध और व्यवस्थित तरीके से काम पूरा करने के निर्देश दिए।
सागर में संग्रहालय का निरीक्षण
निरीक्षण के दौरान सांसद डॉ. लता वानखेड़े, नरयावली विधायक प्रदीप लारिया, कलेक्टर संदीप जीआर सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। संत रविदास जयंती के अवसर पर मध्यप्रदेश शासन ने सागर में इस मंदिर और संग्रहालय के निर्माण की घोषणा की थी। इसका भूमिपूजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था। मूल रूप से परियोजना अगस्त 2025 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अभी कार्य पूर्ण नहीं हो सका है।
आज 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर पी.टी.एस. ग्राउंड, सागर में आयोजित जिला स्तरीय समारोह में ध्वजारोहण करने, परेड की सलामी लेने एवं मनोहारी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का साक्षी बनने का गौरव प्राप्त हुआ।
यह अवसर हमें संविधान के मूल्यों, राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों तथा जनसेवा के संकल्प… pic.twitter.com/4WDaGyJkgR
— Rajendra Shukla (@rshuklabjp) January 26, 2026
संत रविदास मंदिर और संग्रहालय के निर्माण की प्रगति पर केंद्र और राज्य सरकार स्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। पर्यटन, संस्कृति, धर्म एवं धर्मस्व विभाग के अधिकारी नियमित रूप से निर्माण स्थल का निरीक्षण कर रहे हैं, ताकि कार्य समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा हो।
भव्य नागर शैली में बन रहा मंदिर
मंदिर और संग्रहालय परिसर को आधुनिक सुविधाओं, रोशनी और हरियाली के साथ विकसित किया जा रहा है। यह परिसर देश-विदेश के साधकों, शोधकर्ताओं और श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा। मुख्य मंदिर का क्षेत्रफल 5500 वर्ग फीट है, और इसमें गर्भगृह, अंतराल मंडप और अर्धमंडप का निर्माण प्रगति पर है। पूरा परिसर 12 एकड़ भूमि पर विकसित किया जा रहा है। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बने बल्कि अध्ययन, शोध और शांति का अनुभव देने वाला स्थान भी साबित हो।
