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भोपाल में बनी MP की पहली छठ मैया मंदिर, 3 बार टूटा पत्थर; तीसरी बार हुई मां की प्रतिमा पूरी

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Published On: 27 October 2025

भोपाल के भोजपुरी समाज के लिए इस बार का छठ पर्व कुछ खास होने जा रहा है। शहर के लिंक रोड नंबर 3, 5 नंबर छठ घाट पार्क में बना प्रदेश का पहला छठ मैया मंदिर वजह है। रविवार को इस मंदिर का लोकार्पण धूमधाम से हुआ। महापौर मालती राय, पूर्व मंत्री पी.पी. शर्मा, विधायक भगवान दास सबनानी और पार्षद गुड्डू चौहान समेत कई लोग इस मौके पर मौजूद रहे।

जहां आज मंदिर खड़ा है, वहीं सालों से श्रद्धालु छठ पर्व पर अर्घ्य देने आते रहे हैं। लेकिन पहली बार यहां छठ मैया का भव्य मंदिर बना है, जिसमें मां सूर्य रूप में रथ पर सवार हैं। मंदिर बनने के बाद अब छठ के दौरान यहां वैदिक रीति-विधि से पूजन-अर्चन किया जाएगा।

तीन बार टूटा पत्थर

मंदिर की सबसे खास चीज छठ मैया की संगमरमर की प्रतिमा है, जिसे जयपुर के कलाकार महावीर भारती और निर्मला भारती ने बनाया। यह प्रतिमा मकराना के सफेद संगमरमर से बनाई गई है। कलाकारों के मुताबिक, यह काम आसान नहीं था। दो बार पत्थर बीच में टूट गया। तीसरी बार जब 16 टन के दो बड़े ब्लॉक मिले, तब जाकर प्रतिमा बन पाई। करीब तीन महीने तक 10 से ज्यादा कारीगरों ने बिना रुके काम किया।

रथ पर सवार छठ मैया

यह प्रतिमा 6 फीट लंबी, 4 फीट चौड़ी और 5 फीट ऊंची है। इसमें छठ मैया सूर्य देव के रथ पर सवार दिखाई देती हैं। सात सफेद घोड़े और रथ की नक्काशी इसे और भी सुंदर बनाते हैं। कुल 4.5 लाख रुपए की लागत से बनी यह प्रतिमा पूरी तरह समाज के सहयोग से तैयार हुई है।

भोजपुरी भाषी विकास संघ के अध्यक्ष प्रेम नारायण उर्फ लक्ष्मण गिरी ने बताया कि यह मंदिर अब न सिर्फ भोपाल, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए आस्था का प्रतीक बनेगा। उन्होंने कहा, “अब तक छठ मैया की पूजा निराकार रूप में होती थी, लेकिन पहली बार हमने उन्हें सूर्य भगवान के रूप में आकार दिया है।”

देश का चौथा छठ मैया मंदिर

यह मंदिर देशभर में चौथा छठ मैया मंदिर है। इससे पहले दो मंदिर बिहार में और एक झारखंड के रांची में बने हैं। कलाकारों ने बताया कि मंदिर की नींव 2022 में रखी गई थी। उस वक्त कई अड़चनें आईं। पत्थर दो बार टूटे, काम बीच में रुक गया, लेकिन भोजपुरी समाज के सहयोग और मां की कृपा से तीसरे प्रयास में प्रतिमा पूरी हुई। छठ पर्व के मौके पर अब यह मंदिर सिर्फ पूजा की जगह नहीं, बल्कि आस्था और गर्व का प्रतीक बन गया है। यहां पहली बार जब मां की आरती होगी, तो पूरे भोपाल में छठ की गूंज सुनाई देगी।

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