भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में पंचायत प्रतिनिधियों की तीन दिवसीय कार्यशाला चल रही है। दूसरे दिन माहौल तब गरमा गया जब राजगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष ने पंचायती राज प्रतिनिधियों की शक्तियों का मुद्दा मुख्यमंत्री के सामने उठाया। इसी बात को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने सरकार पर सीधा हमला बोल दिया। भोपाल स्थित अपने निवास पर मीडिया से बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि भाजपा को 22 साल की सरकार चलाने के बाद पंचायत प्रतिनिधियों को अधिकार देने की अचानक याद आई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय पंचायतों को मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाए गए थे।
पूर्व सीएम ने कहा कि भाजपा सरकार सिर्फ घोषणा कर रही है। जिला पंचायत और जनपद पंचायत उपाध्यक्षों को स्कूल निरीक्षण का अधिकार तो दिया, लेकिन कार्रवाई करने की शक्ति फिर भी अधिकारियों के पास ही रखी गई। यानी असली अधिकार अब भी पंचायत प्रतिनिधियों तक नहीं पहुंचे।
पंचायतों की ज्यादा सम
दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल इस दिशा में बेहतर काम करेंगे, क्योंकि वे गांवों से आए हैं और पंचायत व्यवस्था को अच्छी तरह समझते हैं। इसके मुकाबले मोहन यादव शहरी पृष्ठभूमि के नेता हैं, इसलिए पंचायत व्यवस्था की उनकी समझ सीमित है। उन्होंने बड़ा आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में पंचायतों से जुड़े कामों में खुलेआम कमीशन लिया जा रहा है। दिग्विजय के अनुसार, कई जिलों में यह सिस्टम बना दिया गया है कि काम की मंजूरी के लिए 20% कमीशन देना पड़ेगा।
20% देने के बाद भी राशि नहीं मिली
पूर्व सीएम ने दावा किया कि उनके क्षेत्र राजगढ़ के कई सरपंचों ने उन्हें बताया कि उन्होंने ‘एडवांस कमीशन’ भी जमा कर दिया, लेकिन फिर भी फंड जारी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा चौथाई भी सच में पंचायतों की हितैषी है, तो कम से कम उन सरपंचों के पैसे वापस कर दे, जो ‘कमीशन’ के नाम पर ले लिए गए। दिग्विजय सिंह ने सरकार से एक के बाद एक कई सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि अगर सरकार सच में पंचायतों को मजबूत करना चाहती है तो क्या प्रतिनिधियों को शिक्षक नियुक्त करने का अधिकार देगी? क्या आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति पंचायतें कर पाएंगी?
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धारा 40 का मुद्दा भी उठाया
उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या वे उस धारा 40 को हटाएंगे, जिसके तहत किसी भी समय सरपंच को हटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस धारा का इस्तेमाल वर्षों से पंचायत प्रतिनिधियों को डराने के लिए किया जाता है। दिग्विजय सिंह ने एक ताजा घटना का जिक्र करते हुए कहा कि राजगढ़ में जिला परिषद अध्यक्ष को एक पुलिसकर्मी ने मंच पर चढ़ने ही नहीं दिया। उन्होंने कहा, “जब जिला परिषद अध्यक्ष का यही सम्मान है, तो बाकी प्रतिनिधियों की क्या स्थिति होगी?”
खुले मंच की चुनौती
सबसे बड़ी बात यह कि दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल दोनों को खुली बहस की चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि वे चाहें तो भाजपा के पंचायत प्रतिनिधियों को भी साथ ले आएं। वे हर सवाल का जवाब देने को तैयार हैं।
