छिंदवाड़ा जिले के परासिया में जहरीली कफ सिरप से हुई मासूम बच्चों की मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व सांसद नकुलनाथ ने परासिया पहुंचकर शोकग्रस्त परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने दिवंगत बच्चों को श्रद्धांजलि अर्पित की और परिजनों को सांत्वना दी।
कमलनाथ ने कहा, “इन परिवारों का दर्द शब्दों में नहीं बताया जा सकता। यह सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे समाज की पीड़ा है। जिनके घरों में हंसी गूंजती थी, वहां अब सन्नाटा है और यह सन्नाटा सरकारी लापरवाही की देन है।”
“सरकार ने टेस्टिंग कराई होती तो बच जातीं जानें”
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि जिन दवाओं की लैब टेस्टिंग और गुणवत्ता जांच होनी चाहिए थी, वह कभी कराई ही नहीं गई। अभी तक यह पता नहीं कि ऐसी और कितनी दवाइयां बाजार में चल रही हैं, जिनकी जांच बाकी है। ये दवाइयां केवल मध्य प्रदेश में नहीं, बल्कि देशभर में बेची गई हैं। अगर समय रहते जांच और कार्रवाई होती, तो आज इतने घर उजड़ने से बच सकते थे।कमलनाथ ने कहा कि यह घटना सिर्फ एक औषधि विफलता नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी से भागने की मिसाल है।
मुआवजे की बात पर बोले कमलनाथ
पीड़ित परिवारों की आर्थिक मदद पर कमलनाथ ने बताया कि उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से बात की है। सरकार को मुआवजे की राशि बढ़ानी चाहिए। इन परिवारों ने जो खोया है, उसकी भरपाई कोई रकम नहीं कर सकती, लेकिन सरकार का रवैया मानवीय होना चाहिए। मेरी ओर से जो भी सहायता संभव होगी, मैं करूंगा। उन्होंने आगे कहा कि अब वक्त आ गया है कि सरकार औषधि आपूर्ति श्रृंखला की पूरी जांच कराए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करे।
जिन दवाइयों की टेस्टिंग होनी चाहिए थी, वह सरकार ने कभी कराई ही नहीं। अभी पता नहीं ऐसी कितनी और दवाइयां हैं जिनकी जांच बाकी है। ये दवाइयां सिर्फ मध्यप्रदेश में ही नहीं, बल्कि देशभर में बेची गई हैं। अगर समय पर कार्रवाई होती तो छिंदवाड़ा में इतने मासूमों की जान नहीं जाती। यह राज्य… pic.twitter.com/t7Vh1Pavem
— MP Congress (@INCMP) October 12, 2025
यह त्रासदी चेतावनी
कमलनाथ ने कहा कि यह घटना केवल एक जिले का मामला नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए चेतावनी की घंटी है। अगर सरकार जवाबदेही तय नहीं करती और मेडिकल कंट्रोल सिस्टम में सुधार नहीं लाती, तो आने वाले दिनों में और भी बड़े हादसे हो सकते हैं। उन्होंने अंत में कहा कि इस घटना ने मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे की पोल खोल दी है। मासूमों की मौत ने हमें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या इंसानी ज़िंदगी अब सिर्फ आंकड़ों में बदलकर रह गई है।
