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भोपाल में शुरू हुआ चार दिवसीय महापर्व छठ, घाटों पर तैयारियां पूरी

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Published On: 25 October 2025

भोपाल में आज से चार दिन तक चलने वाला महापर्व छठ पूजा शुरू हो गया है। राजधानी में नगर निगम और प्रशासन ने घाटों पर पूरी तैयारी कर ली है। साफ-सफाई, रंग-रोगन, मरम्मत, बिजली की सजावट, चलित शौचालय, चेंजिंग रूम और पेयजल जैसी सुविधाएं पूरी तरह दुरुस्त हैं। शहर के प्रमुख घाटों में शीतलदास की बगिया, कमला पार्क, वर्धमान पार्क, खटलापुरा घाट, काली मंदिर घाट, प्रेमपुरा घाट, हथाईखेड़ा डैम, बरखेड़ा और घोड़ा पछाड़ डैम शामिल हैं। कुल मिलाकर 52 घाटों पर इस महापर्व का आयोजन होगा। नगर निगम की टीमें देर रात तक घाटों की सफाई और सजावट में जुटी रही।

भोजपुरी एकता मंच के अध्यक्ष कुंवर प्रसाद ने बताया कि लाखों श्रद्धालु इस बार घाटों पर अर्घ्य देने पहुंचेंगे। बाजारों में पूजा सामग्री, सूप-दउरा, ठेकुआ मोल्ड, फल और सजावट के सामान की बिक्री में तेजी देखी जा रही है।

प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा

प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस बल, गोताखोर टीम और मेडिकल सहायता केंद्र की व्यवस्था की है। ट्रैफिक पुलिस ने घाटों के आसपास आवाजाही और पार्किंग के लिए विशेष रूट प्लान तैयार किया है। घाटों पर प्रकाश व्यवस्था, बैरिकेडिंग और कंट्रोल रूम बनाए गए हैं।

छठ पूजा के चार दिन: खास परंपराएं

पहला दिन – नहाय-खाय

पहले दिन व्रती नदी में स्नान करके कद्दू-भात बनाती हैं। नए वस्त्र पहनकर घर और घाट पर पूजा की तैयारी होती है। इस दिन लहसुन-प्याज का इस्तेमाल नहीं होता। लौकी की सब्जी, अरवा चावल, चने की दाल, आंवला की चटनी, पापड़ और तिलौरी बनते हैं। व्रती और परिवार के सदस्य इन्हें ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करते हैं।

दूसरा दिन – खरना

छठ पूजा के दूसरे दिन उपवास के बाद शाम को खरना का प्रसाद बनाया जाता है। गुड़ और चावल की खीर तथा गेंहूं की रोटी चूल्हे पर बनाई जाती है। आम की लकड़ी से चूल्हा जलाया जाता है, जिसे शुभ माना जाता है। प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू करती हैं।

तीसरा दिन – डाला छठ (सांझी अर्घ्य)

तीसरे दिन प्रसाद में ठेकुआ, चावल के लड्डू, फल और चढ़ावे का सांचा शामिल होते हैं। शाम को बांस की टोकरी में सूप सजाकर सभी मिलकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। सूर्य को दूध और जल दोनों से अर्घ्य दिया जाता है और पूरी रात छठी मैया के गीत गाए जाते हैं। इस दिन सूर्यास्त के समय अर्घ्य देने से आंखों की रोशनी और लंबी आयु की प्राप्ति होती है।

चौथा दिन – भोर अर्घ्य और पारण

अंतिम दिन व्रती उगते सूर्य को अर्घ्य देती हैं और 36 घंटे का निर्जला उपवास समाप्त होता है। प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलने के बाद पारण किया जाता है, जिसमें पूरे परिवार के साथ चावल, दाल, सब्जी, पापड़, चटनी और पकौड़ी खाई जाती हैं।

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