शिक्षक चयन परीक्षा 2023 के तहत छतरपुर में चयनित 11 शिक्षकों के खिलाफ फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस संबंध में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ये सभी शिक्षक मूल रूप से चंबल संभाग के निवासी बताए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, ग्वालियर में तैयार किए गए फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट के आधार पर पूरे मध्य प्रदेश में कई फर्जी शिक्षक नौकरी कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में इस तरह के 200 से अधिक मामलों का खुलासा हो चुका है। अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से फर्जी प्रमाणपत्र बनाकर भर्ती प्रक्रिया में छेड़छाड़ कर रहा था।
FIR में नामजद शिक्षकों की सूची
इस FIR में शामिल शिक्षकों में कविता अहिरवार, नेहा विश्वकर्मा, रोहित नायक, विशाल जैन, मनीष लोधी, भानु प्रताप पटेल, दीपाली त्रिपाठी, रामकुमार पटेल, विनोद कुमार अहिरवार, अवध किशोर मिश्रा और मोनिका सक्सेना के नाम हैं। पुलिस ने बताया कि अब इनकी नियुक्ति और प्रमाणपत्रों की जांच की जाएगी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विशेष टीम गठित
छतरपुर पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच टीम गठित की है। टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वे फर्जी सर्टिफिकेट बनाने और नौकरी दिलाने में शामिल सभी व्यक्तियों का पता लगाएं और जांच पूरी पारदर्शिता के साथ करें। अधिकारी यह भी सुनिश्चित करेंगे कि आगे इस प्रकार की धोखाधड़ी को रोकने के लिए भर्ती प्रक्रिया में सख्ती बरती जाए।
शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि फर्जी सर्टिफिकेट के माध्यम से नौकरी पाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें नियुक्ति रद्द करना और कानूनी मुकदमा चलाना शामिल है।
