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हमीदिया अस्पताल में इलाज के नाम पर ठगी का नया खेल, डॉक्टर बनकर परिजनों से वसूली

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Published On: 8 February 2026

डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग और ऑनलाइन फ्रॉड के मामले आम हो चुके हैं, लेकिन भोपाल के हमीदिया अस्पताल से जुड़ा ठगी का नया पैटर्न सामने आना चौंकाने वाला है। इस बार ठगों ने सीधे अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों को निशाना बनाया और बेहतर इलाज का झांसा देकर उनसे पैसे ऐंठे। जानकारी के अनुसार, जनवरी महीने से अब तक 10 से अधिक लोग इस ठगी का शिकार हो चुके हैं। इनमें से सिर्फ तीन पीड़ित ही कोहेफिजा थाने पहुंचे और करीब 30 हजार रुपए से ज्यादा की ठगी की शिकायत दर्ज कराई। माना जा रहा है कि कई लोग बदनामी या डर के चलते सामने नहीं आए।

जांच में सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि इस पूरे खेल में हमीदिया अस्पताल का स्टाफ भी शामिल था। मरीजों की जानकारी, बीमारी का विवरण और परिजनों के मोबाइल नंबर ठग को अस्पताल के भीतर से ही मुहैया कराए जा रहे थे। इसके बाद आरोपी खुद को डॉक्टर बताकर कॉल करता और बेहतर इलाज या दवा की जरूरत बताकर पैसे मांगता था।

हमीदिया अस्पताल

ठग परिजनों को भरोसे में लेने के बाद क्यूआर कोड भेजता था और तत्काल भुगतान करने का दबाव बनाता था। परिजन यह सोचकर पैसे भेज देते थे कि मरीज के इलाज में कोई कमी न रह जाए। इसी भावनात्मक मजबूरी का फायदा उठाकर आरोपी रकम अपने खाते में ट्रांसफर करवा लेता था।

मुख्य आरोपी इंदौर से गिरफ्तार

इस गिरोह के मुख्य आरोपी, बैतूल निवासी जितेंद्र खागरे को शुक्रवार को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर कोहेफिजा थाने की पुलिस को सौंप दिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी को गुरुवार रात इंदौर से पकड़ा गया। उसके खिलाफ डॉक्टर बनकर धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

सिक्योरिटी एजेंसी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ठग का नेटवर्क हमीदिया अस्पताल के स्त्री रोग, पीडियाट्रिक और इमरजेंसी मेडिसिन विभाग तक फैला हुआ था। मरीजों की जानकारी देने के बदले स्टाफ को 20 प्रतिशत कमीशन दिया जा रहा था, जिससे यह नेटवर्क लगातार फैलता गया।

सात कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध

अब तक की जांच में करीब सात अस्पताल कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। हालांकि, उनकी पहचान अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। इतना तय है कि जानकारी सिर्फ पैसों के लालच में दी जा रही थी, जिससे मरीजों और उनके परिजनों की निजता पूरी तरह खतरे में पड़ गई।

स्टाफ द्वारा ठग को वार्ड नंबर, मरीज का पता, बीमारी का विवरण, मोबाइल नंबर और मरीज की वर्तमान स्थिति तक साझा की जा रही थी। यह जानकारी ठगी को और आसान बना रही थी।

प्रबंधन और पुलिस सख्त

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जिन कर्मचारियों के नाम सामने आएंगे, उन्हें तत्काल सेवा से हटा दिया जाएगा। वहीं, कोहेफिजा थाना पुलिस ने साफ किया है कि पहचान होते ही दोषी कर्मचारियों पर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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