MP के करीब 10 हजार होमगार्ड जवानों को बड़ी राहत मिली। हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने लंबे समय से विवादित “कॉल ऑफ” नियम को खत्म कर दिया। आदेश के बाद अब प्रदेश के होमगार्ड जवानों को पूरे 12 माह नौकरी मिलेगी। अदालत ने यह फैसला 490 याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करने के बाद सुनाया।
ऐतिहासिक फैसला
होमगार्ड जवानों ने बार-बार सेवाएं बाधित होने और सालभर रोजगार न मिलने के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था। कुल 490 याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें जवानों ने कॉल ऑफ नियम को असंवैधानिक बताते हुए इसे खत्म करने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि कॉल ऑफ के चलते उन्हें महीनों बेरोजगार रहना पड़ता है, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो जाता है।
क्या था कॉल ऑफ नियम?
कॉल ऑफ नियम के तहत होमगार्ड जवानों की ड्यूटी लगातार नहीं लगाई जाती थी। कई बार महीनों तक उन्हें सेवा से अलग रखा जाता था और पुनः बुलाया जाता था। इस बीच न तो उन्हें वेतन मिलता था और न ही किसी प्रकार का भत्ता। यही वजह थी कि जवान लंबे समय से इसे खत्म करने की मांग कर रहे थे।
अब 12 माह मिलेगी सेवा
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब प्रदेश के सभी होमगार्ड जवानों को पूरे साल रोजगार का अवसर मिलेगा। अदालत ने साफ कहा कि सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े जवानों को स्थायी और नियमित रोजगार मिलना चाहिए। यह फैसला न केवल उनके आर्थिक हालात को सुधारने वाला होगा, बल्कि राज्य की सुरक्षा व्यवस्था भी और अधिक मजबूत होगी।
परिजनों में खुशी
फैसले के बाद होमगार्ड जवानों और उनके परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई। लंबे समय से नौकरी की अनिश्चितता से जूझ रहे जवानों ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया। उनका कहना है कि अब वे बिना चिंता के अपने परिवार और बच्चों के भविष्य की योजना बना सकेंगे। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब प्रदेश सरकार पर भी यह जिम्मेदारी आ गई है कि वह पूरे साल के रोजगार के लिए वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में होमगार्ड बल को और अधिक सशक्त बनाएगा।
