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RGPV में अनियमितताओं का मुद्दा गरमाया, अभाविप ने दी चेतावनी

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Published On: 27 November 2025

राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) में बीते 5 वर्षों से चल रही कथित वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने बड़ा कदम उठाया है। परिषद के प्रतिनिधियों ने बुधवार को तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और विभाग के मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले की पारदर्शी जांच की मांग की। अभाविप ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2019-20 से लेकर 2023-24 तक की ऑडिट रिपोर्ट अभी तक पब्लिक डोमेन में जारी नहीं की गई है। परिषद का आरोप है कि रिपोर्ट छुपाने से भ्रष्टाचार की आशंकाएं बढ़ रही हैं और विश्वविद्यालय प्रशासन पारदर्शिता से दूर भाग रहा है। परिषद ने चेतावनी दी कि इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी में वित्त का इस तरह उपयोग होना बेहद गंभीर मामला है।

ज्ञापन में अभाविप ने कई गंभीर बिंदु उजागर किए। उनके मुताबिक छात्रों के विकास और कल्याण के लिए बने कोष का गलत इस्तेमाल हुआ है। कई वित्तीय लेन-देन ऐसे हैं जिन पर किसी अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं।

CBI जांच की मांग

विश्वविद्यालय की फिक्स्ड डिपॉजिट मनमाने ढंग से तोड़ी गईं, जिनके ट्रांसफर का हिसाब भी रिकॉर्ड में मौजूद नहीं है। परिषद ने यह भी दावा किया कि बैंक द्वारा काटी गई पेनल्टी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सबसे बड़ा दावा यह किया गया कि करीब 100 करोड़ रुपए से अधिक का कॉरपस फंड उपलब्ध नहीं है। साथ ही विश्वविद्यालय में वित्तीय लेन-देन को लेकर कोई आंतरिक नियंत्रण या गाइडलाइन लागू नहीं रही।

अभाविप ने अपनी प्रमुख मांगों में पाँच साल की ऑडिट रिपोर्ट तत्काल सार्वजनिक करने, पूरे मामले की CBI जांच कराने, विश्वविद्यालय में धारा 54 लागू कर प्रशासन को राज्य शासन के अधीन करने और विवि को तीन क्षेत्रों में विभाजित करने की बात कही। परिषद का कहना है कि बड़े स्तर की व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चलाने के लिए यह जरूरी कदम हैं।

आंदोलन की चेतावनी

प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी ने कहा कि RGPV में रोज एक नया घोटाला सामने आ रहा है। ऐसे में सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि चार दिनों के भीतर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो अभाविप बड़ा आंदोलन छेड़ेगा और इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह शासन की होगी। अभाविप के इस रुख के बाद तकनीकी शिक्षा विभाग पर दबाव बढ़ गया है। अब सभी की नज़र इस बात पर है कि सरकार चार दिनों के भीतर क्या कदम उठाती है और क्या विश्वविद्यालय की ऑडिट रिपोर्ट जनता के सामने लाई जाती है।

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