सतना में छिबौरा तहसील के शासकीय विद्यालय मढ़ी संकुल केंद्र में बच्चों की पढ़ाई और संस्कारों के बजाय नशे का बाजार खड़ा हो गया है। विद्यालय गेट पर वर्षों से विश्वनाथ हरिजन उर्फ़ “छोटे” ने सरकारी जमीन पर कब्जा जमाकर दुकान खोल रखी है। यह दुकान बच्चों के लिए किताबों की जगह दारू, गुटखा और सिगरेट उपलब्ध कराती है।
बच्चों के लिए खतरा
स्थानीय ग्रामीणों ने कई बार इस मामले को लेकर सरपंच और स्कूल प्रबंधन को शिकायतें कीं, लेकिन वहां कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतों के बावजूद दुकान खुले रहने और नशे की सामग्री उपलब्ध होने की स्थिति कायम रही। हताश ग्रामीणों ने अंततः 20 सितंबर 2025 को पुलिस चौकी छिबौरा में लिखित आवेदन दर्ज कर शिकायत दर्ज कराई।
सूत्रों के अनुसार, यह स्थिति “शिक्षक आशीर्वाद योजना” के नाम पर फल-फूल रही है। पूरा गांव इस मामले पर चिंतित है और देख रहा है कि जिला शिक्षा अधिकारी और चौकी प्रभारी बच्चों के भविष्य की रक्षा में कदम उठाएंगे या नज़रअंदाज करेंगे।
शिक्षा का मंदिर या नशे का बाजार?
विद्यालय एक ऐसी जगह है, जहां बच्चों को किताबों और संस्कारों से परिचय कराया जाता है। लेकिन मढ़ी संकुल केंद्र के हालात बताते हैं कि जब शिक्षा के मंदिर में दारू और गुटखा बिकेंगे, तो बच्चों की अगली पीढ़ी पढ़ाई में अव्वल नहीं, बल्कि शराबखोरी और नशे की आदतों में उलझ सकती है। स्थानीय लोग कहते हैं, “जब शिक्षा के मंदिर में नशे की घंटी बजेगी, तो आने वाली पीढ़ी संस्कार नहीं, केवल धुआँ उगलती नजर आएगी।”
प्रशासन की कार्रवाई अपेक्षित
ग्रामीण और अभिभावक अब जिला शिक्षा अधिकारी और पुलिस से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि स्कूल के बाहर नशे की दुकान खुले रहना बच्चों के शैक्षणिक और सामाजिक विकास के लिए गंभीर खतरा है।
समाज में बच्चों की शिक्षा और संस्कारों की रक्षा के लिए जल्द से जल्द इस अवैध दुकान को बंद कराना और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना आवश्यक है।
