MP की राजधानी भोपाल में आयोजित दो दिवसीय IPS मीट केवल प्रशासनिक मंथन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें पुलिस अधिकारियों की सांस्कृतिक प्रतिभा भी खुलकर सामने आई। इस अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया, जहां सख्त छवि के लिए पहचाने जाने वाले पुलिस अफसर मंच पर पूरी तरह अलग अंदाज में नजर आए।
कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा मैहर के पुलिस अधीक्षक अवधेश प्रताप सिंह की रही। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी के साथ मंच पर शानदार नृत्य प्रस्तुति देकर सभी का ध्यान खींच लिया। जैसे ही “चिलम तमाखू को डिब्बा…” गीत की धुन बजी, पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। उनकी सहजता और आत्मविश्वास ने यह साबित कर दिया कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ कला और संस्कृति के लिए भी पुलिस अफसरों के पास समय और हुनर है।
IPS मीट
इसी कड़ी में एक अन्य प्रस्तुति के दौरान एसपी अवधेश प्रताप सिंह ने “नाचे जो बब्बर शेर…” गीत पर मंच पर जोशीला प्रदर्शन किया। इस प्रस्तुति में उनका आत्मविश्वास और ऊर्जा साफ झलक रही थी। खास बात यह रही कि कार्यक्रम की पृष्ठभूमि में सुनाई देने वाली आवाज भी स्वयं एसपी सिंह की थी, जिसने प्रस्तुति को और प्रभावशाली बना दिया।
आईपीएस मीट में पूर्वी क्षेत्र जिसमें जबलपुर, रीवा, शहडोल और बालाघाट संभाग शामिल हैं की सांस्कृतिक प्रस्तुति को भी उपस्थित अधिकारियों और अतिथियों ने खूब सराहा। इन प्रस्तुतियों में लोक-संस्कृति, अनुशासन और टीम वर्क का सुंदर समन्वय देखने को मिला। मंच पर आए हर प्रदर्शन ने यह संदेश दिया कि पुलिस महकमा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी समृद्ध है।
सुकून का मंच
वरिष्ठ अधिकारियों का कहना था कि ऐसे आयोजन पुलिस बल के लिए मानसिक तनाव कम करने और आपसी संवाद बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। लगातार चुनौतीपूर्ण ड्यूटी निभाने वाले अफसरों के लिए यह मंच सुकून और आत्म-अभिव्यक्ति का अवसर बनता है। भोपाल में आयोजित यह आईपीएस मीट प्रशासनिक चर्चाओं के साथ-साथ सांस्कृतिक रंगों के कारण भी यादगार बन गया। खास तौर पर मैहर एसपी की प्रस्तुति ने यह साबित कर दिया कि वर्दी के पीछे भी एक संवेदनशील और रचनात्मक व्यक्तित्व होता है।
