भोपाल में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अवैध आईवीएफ सेंटर और एक सोनोग्राफी केंद्र को सील कर दिया है। यह कदम नर्सिंग होम एक्ट, पीसीपीएनडीटी एक्ट और एआरटी एक्ट के तहत गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद उठाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह संभवतः मध्यप्रदेश का पहला मामला है, जब किसी आईवीएफ सेंटर को नियमों के उल्लंघन पर सील किया गया है।
जांच के दौरान सामने आया कि अयोध्या बायपास रोड पर मार्वल हॉस्पिटल की बिल्डिंग के प्रथम तल पर संचालित ईश्वर्या फर्टिलिटी सेंटर बिना वैध पंजीयन के चल रहा था। यह केंद्र नर्सिंग होम एक्ट के अंतर्गत पंजीकृत नहीं था और न ही आईवीएफ सेवाओं के लिए आवश्यक पीसीपीएनडीटी एक्ट एवं एआरटी एक्ट के तहत कोई अनुमति ली गई थी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इसे गंभीर कानून उल्लंघन मानते हुए केंद्र को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया।
भोपाल में अवैध आईवीएफ
जांच में यह भी सामने आया कि आईवीएफ सेंटर द्वारा मार्वल हॉस्पिटल की पंजीकृत सोनोग्राफी मशीन का उपयोग किया जा रहा था, जो नियमों के विरुद्ध है। यह न केवल चिकित्सा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि लिंग जांच और अन्य संवेदनशील मामलों में दुरुपयोग की आशंका भी पैदा करता है। इसी आधार पर विभाग ने सख्त रुख अपनाया।
निरीक्षण दल ने मार्वल हॉस्पिटल में संचालित सोनोग्राफी सेंटर में भी कई अनियमितताएं पाईं। फॉर्म-एफ का सही तरीके से संधारण नहीं किया जा रहा था, जो पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत अनिवार्य है। इसके अलावा एएनसी रजिस्टर में भी आवश्यक प्रविष्टियां अधूरी या गलत पाई गईं। इन कमियों को गंभीर मानते हुए सोनोग्राफी मशीन को भी सील कर दिया गया और संबंधित दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं।
FIR की तैयारी
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी मनीष शर्मा ने बताया कि दोनों केंद्रों में पाई गई अनियमितताएं गंभीर प्रकृति की हैं। फिलहाल जब्त दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जा रही है और जल्द ही संबंधित संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे अवैध और नियमों का उल्लंघन करने वाले चिकित्सा संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा, पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिकता है। अवैध रूप से संचालित चिकित्सा केंद्र न केवल कानून का उल्लंघन करते हैं, बल्कि मरीजों के जीवन के लिए भी खतरा बन सकते हैं।
