MP में मुफ्त राशन योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है। राज्य सरकार ने यह पाया कि योजना का लाभ ऐसे लोगों को भी मिल रहा है, जिनकी सालाना आय 6 लाख रुपए से अधिक है, या जो किसी कंपनी में डायरेक्टर हैं और जीएसटी/टैक्स दे रहे हैं। अब 5.46 करोड़ हितग्राहियों के डेटा की जांच की जा रही है।
ई-केवाईसी अभियान
केंद्र सरकार के निर्देश पर स्मार्ट पीडीएस फॉर्मूला लागू किया गया, जिसके तहत हर राज्य का डेटा केंद्रीय सर्वर में फीड किया गया। इसके विश्लेषण में मध्यप्रदेश में कुल 24 लाख अपात्र हितग्राही पाए गए। इनमें से 12 लाख मृतक पाए गए और उनकी सूची से काट दी गई। इसके बाद 7 लाख नए नाम पात्रों की सूची में जोड़े गए। खाद्य आयुक्त कर्मवीर शर्मा ने बताया कि पूरे प्रदेश में ई-केवाईसी अभियान चलाकर हितग्राहियों की पहचान की जा रही है और अब तक 90 प्रतिशत से अधिक का सत्यापन पूरा हो चुका है।
प्रमुख गड़बड़ी के मामले
- आय छह लाख से अधिक: भोपाल के अमित कुमार और नीलबड़ के अमन महबूब ने लोन के लिए आय अधिक दिखाई, जबकि असल में वे गरीब हैं। दोनों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया।
- कंपनी के डायरेक्टर: भोपाल के मुनव्वर खान समेत 18 हजार से अधिक ऐसे हितग्राही पाए गए, जो किसी रजिस्टर्ड कंपनी में डायरेक्टर हैं। इन सभी को नोटिस भेजे गए और 1 हजार से अधिक नाम हटाए गए।
- जीएसटी दाता: गरीबों का राशन लेने वाले 1,381 हितग्राही ऐसे हैं, जिनका टर्नओवर 25 लाख रुपए से अधिक है। इनमें से 103 नाम हटाए जा चुके हैं, जबकि 1,278 हितग्राहियों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
खाद्य विभाग ने अपात्र हितग्राहियों को नोटिस जारी किया है और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जा रहा है। कई लोगों ने जवाब में राशन कार्ड रद्द करने या संशोधन की मांग की है।
