MP के 17 सरकारी नर्सिंग कॉलेजों को इस साल बीएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम के लिए मान्यता नहीं मिली है। 2025-26 सत्र में बीएससी नर्सिंग करने वाले छात्रों के पास अब केवल चार सरकारी कॉलेजों के विकल्प बचे हैं। पिछले साल 16 पुराने कॉलेजों सहित कुल 21 सरकारी कॉलेजों ने आवेदन किया था, लेकिन इस बार केवल चार कॉलेजों को ही मान्यता मिली।
सरकारी कॉलेजों में सीटों में भारी कटौती
बीते साल राज्य के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में कुल 1,340 बीएससी नर्सिंग सीटें थीं। इस साल यह संख्या घटकर सिर्फ 515 रह गई है। यानी नए सत्र में सरकारी कॉलेजों में 825 सीटें कम हो गई हैं। छात्रों के लिए यह एक बड़ा झटका है, क्योंकि प्री-नर्सिंग सिलेक्शन टेस्ट और जनरल नर्सिंग मिडवाइफरी ट्रेनिंग सिलेक्शन टेस्ट 24 से 27 जून 2025 तक आयोजित हुए थे। 78,157 अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र जारी किए गए, जिनमें से 60,707 उम्मीदवार परीक्षा में उपस्थित हुए।
मान्यता पाने वाले सरकारी कॉलेज
- गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ नर्सिंग, जीएमसी भोपाल
- गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ नर्सिंग, इंदौर
- गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ नर्सिंग, जीएम हॉस्पिटल रीवा
- गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ नर्सिंग, उज्जैन
मिली बड़ी संख्या में मान्यता
वहीं, निजी नर्सिंग कॉलेजों के लिए इस साल अवसर बढ़ गया है। 188 निजी बीएससी नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता दी गई, जिनमें कुल 10,390 सीटें उपलब्ध होंगी। जनरल नर्सिंग मिडवाइफरी कोर्स के लिए 231 निजी कॉलेजों को मान्यता मिली, जिनमें 10,838 सीटें हैं।
अधिकारियों का कहना है कि इस बार सरकारी कॉलेजों को मान्यता नहीं मिलने का मुख्य कारण नियमों की कड़ाई है। इसके चलते राजधानी भोपाल का मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (BMHRC) तक इस बार मान्यता से बाहर रहा।
NSUI ने उठाए सवाल
एनएसयूआई ने निजी कॉलेजों को मान्यता देने पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने आरोप लगाया कि कई निजी कॉलेज नियमों का पालन नहीं कर रहे और फर्जी फैकल्टी के साथ संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिकायतों के बावजूद निजी कॉलेजों को मान्यता दी गई, जबकि सरकारी कॉलेजों की मान्यता रोक दी गई। एनएसयूआई ने कहा कि वे इस मामले को सीबीआई और हाईकोर्ट में ले जाएंगे।
NSUI की मांग
- नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया पारदर्शी हो।
- फर्जी फैकल्टी और नियम उल्लंघन करने वाले निजी कॉलेजों की मान्यता रद्द की जाए।
- नर्सिंग कॉलेज घोटाले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
