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Bhopal समत्व भवन में हुई बैठक, CM मोहन यादव ने की इन मुद्दों पर चर्चा

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Published On: 27 January 2026

Bhopal में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि सम्राट विक्रमादित्य का साहस, न्यायप्रियता और सृजनशीलता भारतीय संस्कृति की मजबूत नींव है। नई पीढ़ी को उनके योगदान से परिचित कराना समय की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन में होने वाला विक्रमोत्सव-2026 केवल उत्सव नहीं, बल्कि भारत की ऐतिहासिक चेतना को जीवंत करने का अवसर है। आयोजन में सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व के हर पहलू को सामने लाया जाए।

समत्व भवन में हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि विक्रमोत्सव भव्य, सुव्यवस्थित और सांस्कृतिक गरिमा के अनुरूप होना चाहिए। किसी भी स्तर पर तैयारी में कमी नहीं दिखनी चाहिए।

Bhopal समत्व भवन में हुई बैठक

मुख्यमंत्री ने आयोजन की रूपरेखा, विभागीय समन्वय और व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यह उत्सव प्रदेश की पहचान और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती देगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन उज्जैन तक सीमित न रहे। इसे प्रदेश के अन्य शहरों और बाहर के राज्यों में भी प्रस्तुत किया जाए। स्कूल और कॉलेजों में सम्राट विक्रमादित्य पर सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताएं कराने के भी निर्देश दिए गए। उद्देश्य है कि युवा इतिहास को किताबों से बाहर महसूस करें।

विक्रमोत्सव-2026 को कृषक कल्याण वर्ष से भी जोड़ा जाएगा। कृषि आधारित प्रदर्शनियां, प्राकृतिक खेती, नरवाई प्रबंधन और पशुपालन से जुड़ी गतिविधियां शामिल होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को भी सामने लाया जाए। विज्ञान महाविद्यालय, इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

आकर्षण का केंद्र

विक्रमादित्य अलंकरण को राष्ट्रीय स्वरूप देने के निर्देश भी दिए गए। इसमें केंद्र सरकार की सहभागिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। बैठक में बताया गया कि विक्रमोत्सव की शुरुआत 15 फरवरी को होगी। शिवरात्रि मेलों का शुभारंभ, कलश यात्रा और शिव से जुड़े सांस्कृतिक आयोजन होंगे। विक्रम व्यापार मेला और विभिन्न विषयों पर प्रदर्शनियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इनमें विक्रमादित्य, अयोध्या, अस्त्र-शस्त्र और जनजातीय संस्कृति शामिल होगी।

16 से 25 फरवरी तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नाट्य प्रस्तुतियां होंगी। इसके बाद इतिहास, न्याय और शोध पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय समागम होंगे। 10 से 12 मार्च तक संगीत के उद्भव और विकास पर वैचारिक मंथन होगा। 20 से अधिक देशों की पौराणिक फिल्मों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। भारतीय विज्ञान शोध संगोष्ठी, वेद अंताक्षरी और विभिन्न बोलियों में कवि सम्मेलन भी कार्यक्रम में शामिल हैं।

शिप्रा तट पर मुख्य कार्यक्रम

19 मार्च को गुड़ी पड़वा पर उज्जयिनी गौरव दिवस मनाया जाएगा। शिप्रा तट पर मुख्य कार्यक्रम होगा। इस दिन सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण, विक्रम पंचांग और आर्ष भारत के नए संस्करण का लोकार्पण होगा। नदी कथा पर आधारित नृत्य-नाट्य भी प्रस्तुत किया जाएगा। वर्ष प्रतिपदा पर प्रसिद्ध गायक सोनू निगम की प्रस्तुति होगी। भव्य आतिशबाजी के साथ आयोजन का समापन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विक्रमोत्सव सिर्फ अतीत का स्मरण नहीं, बल्कि भविष्य को दिशा देने वाला आयोजन बने। यही इसका असली उद्देश्य है।

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