मध्य प्रदेश में मोहन सरकार के दो साल पूरे होने पर नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने विभाग की उपलब्धियों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान शहरी विकास, अधोसंरचना और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को लेकर सवाल-जवाब हुए। खासतौर पर स्मार्ट सिटी योजना पर खर्च और उसके जमीन पर दिखने वाले असर को लेकर पत्रकारों ने मंत्री से सीधे सवाल किए।
पत्रकारों ने पूछा कि 2014 में स्मार्ट सिटी कॉन्सेप्ट आने के बाद प्रदेश के कई शहरों भोपाल, ग्वालियर, सतना, सिंगरौली समेत को स्मार्ट सिटी घोषित किया गया। करोड़ों रुपए का फंड भी आया, लेकिन आम लोगों को यह समझ नहीं आ रहा कि आखिर कहां-कहां शहर सच में स्मार्ट बने हैं। सवाल यह भी था कि जो सौ करोड़ या उससे ज्यादा राशि आई, उसका ठोस नतीजा जनता को क्यों नहीं दिख रहा।
मंत्री का दो टूक जवाब
इस पर कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि नगर निगम और स्मार्ट सिटी के सभी काम सड़क, भवन या लाइट की तरह दिखाई नहीं देते। कुछ काम ऐसे होते हैं, जो शहर की रीढ़ होते हैं लेकिन जमीन के नीचे होते हैं। उन्होंने कहा कि भोपाल और सतना जैसे शहरों में बड़ी ड्रेनेज लाइन डाली गई, जिसके दौरान सड़कें खुदीं, बाजार प्रभावित हुए और लोगों को भारी असुविधा हुई।
मध्य प्रदेश का सर्वांगीण विकास ही हमारा ध्येय है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग इसी दृष्टि के साथ वर्ष 2047 के विजन पर काम कर रहा है।
इसी क्रम में आज भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया के साथियों से संवाद हुआ। इस अवसर पर प्रदेश की विकास यात्रा, सरकार के दो वर्षों की… pic.twitter.com/p0rVzqseoT
— Kailash Vijayvargiya (@KailashOnline) December 18, 2025
मंत्री ने बताया कि जब मुख्य ड्रेनेज लाइन डाली जाती है, तो पूरी सड़क खोदनी पड़ती है। उस वक्त जनता नाराज होती है, अखबारों में आलोचना होती है, लेकिन जब काम पूरा होता है और सड़क दोबारा बनती है, तब वही काम शहर की सबसे बड़ी जरूरत साबित होता है। यह ड्रेनेज लाइन अगले 10, 20 साल की आबादी को ध्यान में रखकर बनाई जाती है, इसलिए इसमें भारी खर्च आता है।
पैसा जमीन के नीचे
विजयवर्गीय ने कहा कि पानी की सप्लाई के लिए भी शहरों में नई डिस्ट्रीब्यूशन लाइन डाली जाती है। खुदाई के बाद सड़क को रिस्टोर किया जाता है। इस तरह का खर्च लोगों को दिखाई नहीं देता, इसलिए सवाल उठते हैं कि पैसा कहां चला गया। उन्होंने साफ कहा कि कई बार 200-300 करोड़ रुपए जमीन के नीचे खर्च हो जाते हैं, इसलिए वे नजर नहीं आते। मंत्री के मुताबिक, स्मार्ट सिटी का असली मतलब चमकदार इमारतें नहीं, बल्कि घरों तक सुविधाएं पहुंचाना है। आज कई इलाकों में लोगों के घरों तक पानी पहुंच रहा है। पहले जिन घरों में ड्रेनेज जाम रहता था, वहां अब सफाई है। ये बदलाव धीरे-धीरे महसूस होते हैं, तुरंत नहीं दिखते।
नतीजों पर भरोसे की अपील
अंत में मंत्री ने कहा कि शहरी विकास में धैर्य जरूरी है। जो काम आज जमीन के नीचे हो रहा है, वही आने वाले वर्षों में शहरों को बेहतर बनाएगा। हर विकास कार्य का असर तुरंत दिखे, यह जरूरी नहीं, लेकिन उसका फायदा लंबे समय तक मिलता है।
