MP के रतलाम में हुई जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक उस वक्त चर्चा में आ गई, जब प्रभारी मंत्री विजय शाह ने लाड़ली बहना योजना को लेकर मंच से ऐसा बयान दे दिया, जिसे दबाव और चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। मंत्री के शब्दों ने न सिर्फ बैठक में बैठे अधिकारियों को असहज किया, बल्कि बाद में सियासी हलकों में भी तीखी प्रतिक्रिया शुरू हो गई। बैठक के दौरान मंत्री ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी से जिले में लाड़ली बहनों की संख्या पूछी। अधिकारी ने बताया कि जिले में लगभग ढाई लाख महिलाएं इस योजना का लाभ ले रही हैं। इस पर मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के दो साल पूरे होने पर कम से कम 50 हजार महिलाओं को सम्मान कार्यक्रम में आना चाहिए।
मंत्री ने मंच से कहा कि सरकार हर महीने 1500 रुपए के हिसाब से करोड़ों रुपए महिलाओं के खातों में डाल रही है, ऐसे में दो साल में एक बार धन्यवाद देना स्वाभाविक है। उन्होंने यहां तक कहा कि जो महिलाएं कार्यक्रम में नहीं आएंगी, उनके मामलों की जांच पेंडिंग की जा सकती है। आधार लिंक न होने जैसे मामलों को रोकने की बात भी कही गई, जिससे बयान और ज्यादा विवादित हो गया।
माहौल हुआ असहज
मंत्री की टिप्पणी के बाद बैठक में मौजूद अधिकारी और जनप्रतिनिधि असहज नजर आए। किसी ने खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन मंच और सभागार में खामोशी साफ तौर पर स्थिति की गंभीरता बता रही थी।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर मंत्री के बयान को महिलाओं का अपमान बताया। उन्होंने लिखा कि जिन महिलाओं को सम्मान मिलना चाहिए, उन्हें धमकी दी जा रही है। पटवारी ने इसे महिला विरोधी सोच का उदाहरण बताया। वहीं, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने भी बयान की निंदा करते हुए मंत्री को पद से हटाने की मांग की।
जिन लाड़ली बहनों का भाजपा को सम्मान करना चाहिए, वहां उन्हें भाजपा के लाड़ले मंत्री अपमानित कर रहे हैं।
पहले देश की गौरव कर्नल सोफिया कुरैशी पर ओछी टिप्पणी और अब प्रदेश की माता बहनों को धमकी, यह भाजपा की कुंठित और महिला विरोधी मानसिकता का साफ प्रमाण है।
मुख्यमंत्री जी की चुप्पी… pic.twitter.com/vKS1hzvz6v
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) December 14, 2025
योजना का मौजूदा स्वरूप
लाड़ली बहना योजना के तहत प्रदेश की करीब 1.27 करोड़ महिलाओं को हर महीने 1500 रुपए की सहायता दी जा रही है। यह राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे खातों में पहुंचती है। भाईदूज के अवसर पर सरकार ने राशि में 250 रुपए की बढ़ोतरी की थी। योजना का मकसद महिलाओं को आर्थिक सहारा और आत्मनिर्भर बनाना है। मंत्री के बयान के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या जनकल्याणकारी योजनाओं को राजनीतिक उपस्थिति से जोड़ा जाना उचित है। फिलहाल मामला तूल पकड़ चुका है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।
