MP में चुनाव ड्यूटी को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा उठाया गया मुद्दा आखिर हाईकोर्ट तक पहुंच गया था। प्रदेश में 10 हजार से ज्यादा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कोर्ट से अपील की थी कि उन्हें चुनाव की ड्यूटी से मुक्त किया जाए, क्योंकि इससे उनका मूल काम आईसीडीएस सेवाएंप्रभावित होती हैं। बुधवार को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने यह याचिका पूरी तरह खारिज कर दी।
सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ में हुई। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर हर विभाग अपना–अपना काम ही करने की जिद रखने लगे और चुनाव ड्यूटी से मना कर दे, तो फिर चुनाव कराने की जिम्मेदारी कौन संभालेगा? सरकार को चुनाव करवाना होता है और वह अपने सिस्टम के ही कर्मचारियों को यह जिम्मेदारी सौंपती है। इसमें किसी तरह की छूट नहीं दी जा सकती।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का तर्क क्या था?
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनका मुख्य काम कुपोषण रोकना, बच्चों और गर्भवती महिलाओं की देखभाल करना और आईसीडीएस सेवाएं देना है। अगर उन्हें चुनाव ड्यूटी में लगाया जाता है, तो ये जरूरी सेवाएं बाधित होंगी। इसलिए उनसे दूसरा कोई काम नहीं लिया जाना चाहिए। याचिका शासकीय एकता यूनियन भोपाल की ओर से लगाई गई थी। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में पहले से ही स्टाफ कम है, ऊपर से चुनाव जैसे भारी काम सौंपने से मूल सेवाएं बिगड़ जाएंगी।
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने साफ टिप्पणी की कि अगर सभी विभागों के कर्मचारी चुनाव ड्यूटी करने से इनकार कर देंगे, तो चुनाव प्रक्रिया ही ठप पड़ जाएगी। सरकार चुनाव कराती है तो अपने ही कर्मचारियों की मदद लेगी। आप सिस्टम का हिस्सा हैं, इसलिए जिम्मेदारी निभाना ही होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव कोई सामान्य काम नहीं, यह संवैधानिक प्रक्रिया है। इसमें सभी सरकारी कर्मचारियों का सहयोग अनिवार्य है।
अब इसका असर क्या पड़ेगा?
हाईकोर्ट का यह फैसला पूरे प्रदेश की 10 हजार से ज्यादा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर असर डालेगा। अब उन्हें चुनाव ड्यूटी करनी ही होगी, चाहे वह बूथ पर तैनाती हो, मतदान सामग्री का वितरण हो या चुनाव से जुड़े अन्य काम।
