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MP कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने तीखे आरोप लगाए, मंत्री से इस्तीफे की मांग तेज

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Published On: 9 December 2025

MP की राजनीति में एक बार फिर नशे के कारोबार को लेकर विवाद गहरा गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए मंत्री प्रतिमा बागरी से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की है। पटवारी का कहना है कि मंत्री के परिजनों के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आए हैं, ऐसे में उनका पद पर बने रहना नैतिक रूप से ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य की छवि लगातार खराब होती जा रही है और सरकार इन घटनाओं पर आंख मूंदकर बैठी है।

पटवारी ने आरोपों की कड़ी जोड़ते हुए कहा कि यह पहली बार नहीं है जब भाजपा से जुड़े लोगों का नाम नशे के मामलों में आया हो। उन्होंने याद दिलाया कि कुछ समय पहले एमडी ड्रग मामले में पूर्व मंत्री विश्वास सारंग के करीबी लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। अब एक नया मामला सामने आया है, जिसमें मंत्री प्रतिमा बागरी के बहनोई और सगे भाई को गांजे की लंबी खेप के साथ पुलिस ने गिरफ्तार किया है। विपक्ष का कहना है कि बार-बार ऐसे मामले सामने आना “सिस्टम के भीतर सड़न” का संकेत है।

पटवारी का सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष ने तीखे शब्दों में पूछा, “यह क्या संदेश है? क्या सरकार खुद नशे में लिप्त है?” उन्होंने कहा कि जिस राज्य में एक तरफ अवैध नशे का कारोबार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार खुद 17,000 करोड़ रुपए का शराब बिक्री राजस्व लक्ष्य तय करके नशे को बढ़ावा दे रही है। पटवारी ने आरोप लगाया कि राज्य शराब और नशे के कारोबार में पंजाब को भी पीछे छोड़ चुका है।

वल्लभ भवन पर भी उठाए सवाल

पटवारी ने दावा किया कि नशा माफिया सिर्फ जमीन पर ही सक्रिय नहीं है, बल्कि सत्ता के गलियारों तक उसकी पहुंच है। उन्होंने कहा कि माफिया ने वल्लभ भवन की पांचवीं मंजिल तक को घेर रखा है। उनका इशारा सीधे-सीधे यह बताने की कोशिश थी कि प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भी इस पूरे नेटवर्क को संरक्षण मिलता है। उन्होंने मांग की कि सरकार तत्काल स्थिति स्पष्ट करे और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।

चुप्पी पर विपक्ष का हमला

इस पूरे मामले में भाजपा की ओर से अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए है और नैतिक जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है। पटवारी ने कहा कि जब तक मंत्री प्रतिमा बागरी अपने पद से हटाई नहीं जातीं या स्वयं इस्तीफा नहीं देतीं, तब तक इस मामले की निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे को बड़े पैमाने पर उठाया जाएगा।

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