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MP News: भ्रष्टाचार की ‘साफ-सुथरी’ छवि दरकी, महिला अधिकारी भी अब रडार पर

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Published On: 14 December 2025

MP सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार की चर्चा होते ही अब तक ज्यादातर पुरुष अफसरों की तस्वीर उभरती थी। महिला अधिकारियों को ईमानदारी और जवाबदेही का प्रतीक माना जाता रहा, लेकिन मध्य प्रदेश में हाल के वर्षों में यह धारणा कमजोर पड़ती दिख रही है। रिश्वत, संगठित वसूली, हवाला कारोबारियों से सांठगांठ और आय से अधिक संपत्ति जैसे मामलों में अब महिला अधिकारी और कर्मचारी भी सामने आ रही हैं।

लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू भले ही महिला आरोपियों का अलग से रिकॉर्ड न रखते हों, लेकिन पिछले 20 वर्षों की कार्रवाई के विश्लेषण से साफ है कि बीते एक दशक में रिश्वत के मामलों में दोषी ठहराई गई महिलाओं की संख्या करीब तीन गुना बढ़ी है। डीएसपी, आबकारी अधिकारी, इंजीनियर, पटवारी से लेकर स्कूल टीचर तक इस सूची में शामिल हैं।

आबकारी अधिकारी

देवास में प्रभारी सहायक आबकारी आयुक्त मंदाकिनी दीक्षित का मामला सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। शराब ठेकेदार दिनेश मकवाना ने जहर खाकर जान दे दी। मौत से पहले बनाए वीडियो में उसने हर महीने 7.5 लाख रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया। परिजनों और सामने आए ऑडियो-वीडियो ने मामले को और गंभीर बना दिया। हालांकि अधिकारी ने आरोपों से इनकार करते हुए खुद को ब्लैकमेलिंग का शिकार बताया। विवाद बढ़ने पर सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया।

पुलिस की डील

सिवनी में एसडीओपी पूजा पांडेय का मामला पुलिस विभाग के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। हवाला के तीन करोड़ रुपए पकड़ने के बाद कारोबारी को छोड़ दिया गया और बाद में रकम को आधा-आधा बांटने का प्रस्ताव सामने आया। मामला खुलते ही 11 पुलिसकर्मियों पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ और एसडीओपी को सस्पेंड कर दिया गया। सागर जिले की सरकारी स्कूल टीचर प्रतिभा राय पर 23 जिलों में अवैध रेत कारोबार चलाने के आरोप सामने आए। जांच में खुलासा हुआ कि उनकी अनुमति के बिना इलाके से रेत का एक डंपर तक नहीं गुजरता था। खनिज विभाग और पुलिस की मिलीभगत के संकेत भी मिले, जिसके बाद विभागीय कार्रवाई की तैयारी शुरू हुई।

संविदा इंजीनियर की अकूत संपत्ति

पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन में संविदा इंजीनियर हेमा मीणा के ठिकानों पर लोकायुक्त छापे में करोड़ों की संपत्ति सामने आई। सीमित वेतन के बावजूद बंगला, लग्जरी कारें और फार्महाउस मिलने पर उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। भोपाल में पटवारी सुप्रिया जैन को जमीन सीमांकन के बदले रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। प्रति एकड़ तय रकम वसूलने की शिकायत के बाद लोकायुक्त ने ट्रैप कार्रवाई कर पूरे सिस्टम की पोल खोल दी।

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