MP में नर्सिंग कॉलेजों में जारी गड़बड़ियों और सरकारी लापरवाही ने नर्सिंग शिक्षा की स्थिति बद से बदतर कर दी है। कभी नर्सिंग शिक्षा के लिए पूरे देश में पहचान बनाने वाला प्रदेश अब अव्यवस्था और भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया है। एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि लगातार तीसरे वर्ष नर्सिंग कॉलेजों की सीटें खाली रहना इस बात का सबूत है कि सरकार ने इस क्षेत्र को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। वर्ष 2025-26 सत्र में कुल 28,560 सीटों में से सिर्फ 17,735 सीटों पर ही रजिस्ट्रेशन हुए हैं, यानी करीब 30 प्रतिशत सीटें खाली हैं।
लगातार तीसरे साल सीटें खाली
2023-24 सत्र में पूरी तरह सत्र रद्द करना पड़ा था, 2024-25 में भी 70 प्रतिशत सीटें खाली रहीं। अब 2025-26 में फिर वही स्थिति दोहराई जा रही है। परमार ने कहा कि छात्रों का प्रदेश की नर्सिंग शिक्षा से पूरी तरह मोहभंग हो चुका है।
इस साल 21 में से सिर्फ 8 शासकीय नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता मिली है, जबकि निजी कॉलेजों में बीएससी नर्सिंग के 196 और जीएनएम नर्सिंग के 247 कॉलेजों को अनुमति दी गई है।
नीतियों पर सवाल
- बीएससी व जीएनएम नर्सिंग: 23,174 सीटें → सिर्फ 14,722 रजिस्ट्रेशन
- पोस्ट बीएससी नर्सिंग: 3,610 सीटें → सिर्फ 1,539 रजिस्ट्रेशन
- एमएससी नर्सिंग: 1,776 सीटें → सिर्फ 1,474 रजिस्ट्रेशन
परमार का कहना है कि निजी कॉलेजों की साख खत्म हो चुकी है और ज्यादातर छात्र अब केवल शासकीय कॉलेजों में भरोसा दिखा रहे हैं।
फर्जी कॉलेजों का जाल बना वजह
एनएसयूआई नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश में फर्जी नर्सिंग कॉलेजों का नेटवर्क अभी भी सक्रिय है। नर्सिंग माफिया और शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी मिलकर नामांकन से लेकर परीक्षा तक की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि चार साल की डिग्री पूरी करने में छात्रों को आठ साल लग रहे हैं।
कार्रवाई नहीं हुई तो होगा आंदोलन
जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तुरंत सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले वर्षों में प्रदेश ही नहीं, पूरे देश में योग्य नर्सिंग प्रोफेशनल्स की भारी कमी हो जाएगी। एनएसयूआई ने कहा कि भाजपा सरकार की लापरवाही अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी और छात्र-छात्राओं के हक की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ी जाएगी।
