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कर्तव्य पथ पर MP की झांकी ने लूटा दिल, अहिल्याबाई होलकर को समर्पित प्रस्तुति बनी आकर्षण का केंद्र

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Published On: 26 January 2026

77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित राष्ट्रीय समारोह में MP की झांकी ने खास पहचान बनाई। लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर को समर्पित यह झांकी जैसे ही राजपथ पर आगे बढ़ी, दर्शकों के बीच उत्साह और गर्व की लहर दौड़ गई। समारोह में मौजूद केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और शिवराज सिंह चौहान तालियां बजाते हुए झांकी की सराहना करते नजर आए।

मध्य प्रदेश की झांकी नारी सशक्तिकरण, सुशासन, न्याय और सांस्कृतिक गौरव की प्रतीक बनकर सामने आई। इसमें लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के आदर्शों, उनके प्रशासनिक कौशल और सामाजिक योगदान को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया। झांकी ने यह संदेश दिया कि मध्य प्रदेश अपनी ऐतिहासिक विरासत को सहेजते हुए विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है।

MP की झांकी ने लूटा दिल

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने झांकी का वीडियो साझा करते हुए लिखा कि मध्य प्रदेश की यह प्रस्तुति मातृशक्ति, सनातन परंपरा और विकसित भारत के संकल्प का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह झांकी न केवल प्रदेश के गौरवशाली इतिहास को दर्शाती है, बल्कि आने वाले समय के लिए आत्मविश्वास और प्रेरणा का संदेश भी देती है।

मध्य प्रदेश बीजेपी ने भी झांकी का वीडियो साझा करते हुए इसे “विरासत को सहेजकर समृद्धि की ओर अग्रसर मध्यप्रदेश” की भावना का सजीव उदाहरण बताया। पार्टी ने कहा कि यह झांकी प्रदेश की अस्मिता, संस्कृति और विकास यात्रा को पूरे देश के सामने गर्व के साथ प्रस्तुत करती है।
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसे आत्मगौरव का प्रतीक बताते हुए कहा कि मध्य प्रदेश अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है और पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रगति की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

संतुलित संदेश

झांकी में मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक गौरव और आधुनिक विकास की झलक देखने को मिली। इसमें यह संदेश प्रमुखता से उभरा कि प्रदेश केवल अतीत की विरासत पर गर्व नहीं करता, बल्कि भविष्य के लिए भी ठोस और दूरदर्शी योजनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। कर्तव्य पथ पर मिली सराहना ने मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत किया है। यह झांकी न केवल कला और परंपरा का प्रदर्शन थी, बल्कि प्रदेश के विकास, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक चेतना का प्रभावशाली प्रतिनिधित्व भी बनी।

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