भोपाल-देवास राज्य राजमार्ग को स्वच्छ और सुव्यवस्थित बनाने के लिए मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते का उद्देश्य हाईवे से जुड़े शहरी निकायों और ग्राम पंचायत क्षेत्रों में कचरा संग्रहण, सड़क सफाई और अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाना है।
एमओयू के तहत हाईवे के निर्धारित हिस्सों पर फुली मैकेनाइज्ड वाहन-माउंटेड रोड वैक्यूम लिटर कलेक्शन मशीन के माध्यम से नियमित सफाई की जाएगी। यह मशीन सड़क पर फैले कचरे, धूल और अन्य अपशिष्ट को स्वचालित रूप से एकत्र करेगी, जिससे हाईवे की साफ-सफाई बेहतर होगी और यात्रियों को अधिक सुरक्षित व स्वच्छ वातावरण मिलेगा।
भोपाल-देवास स्टेट हाईवे
इस परियोजना के क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी जिला पंचायत सीहोर को सौंपी गई है। जिला पंचायत कचरा निपटान, विभागीय समन्वय और पूरी व्यवस्था की मॉनिटरिंग सुनिश्चित करेगी। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि एकत्रित कचरे का वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल तरीके से निपटान किया जाए।
एमओयू के अनुसार, एमपीआरडीसी के टोल ठेकेदार (कंसेशनेयर) को मशीन के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ठेकेदार द्वारा चालक और ऑपरेटर की नियुक्ति, ईंधन की व्यवस्था, मशीन का नियमित रख-रखाव और दैनिक कार्यों का रिकॉर्ड संधारण किया जाएगा। इससे परियोजना के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहेगी।
स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
इस समझौते से न केवल भोपाल-देवास हाईवे की साफ-सफाई बेहतर होगी, बल्कि इससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। कचरा प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था से सड़क किनारे गंदगी कम होगी, जल स्रोतों के प्रदूषण पर नियंत्रण रहेगा और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल प्रदेश में सड़क विकास और स्वच्छता प्रबंधन के लिए एक मॉडल प्रोजेक्ट बन सकती है। हाईवे पर बेहतर रख-रखाव से यातायात सुगम होगा, दुर्घटनाओं की संभावना घटेगी और यात्रियों को अधिक सुविधाजनक अनुभव मिलेगा। आने वाले समय में इस मॉडल को अन्य प्रमुख मार्गों पर भी लागू किए जाने की संभावना है।
