भोपाल | सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को उजागर करने के लिए NSUI मध्यप्रदेश ने शुक्रवार को राजधानी में एक बड़ा अभियान “स्कूलों की पोल खोल” लॉन्च किया। NSUI के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने प्रेस वार्ता में अभियान की घोषणा करते हुए राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला।
चौकसे ने कहा कि प्रदेश के सरकारी स्कूल कागजों में हाईटेक हो चुके हैं, लेकिन ज़मीन पर बच्चों को छत, बिजली और शौचालय तक मयस्सर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नाम बदलने और घोषणाओं में व्यस्त है, जबकि शिक्षा का पूरा ढांचा चरमराया हुआ है। उन्होंने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि प्रदेश में 12,200 स्कूल ऐसे हैं जहां सिर्फ एक शिक्षक है, 9,500 स्कूलों में आज भी बिजली नहीं पहुंची है और 1,700 से ज्यादा स्कूलों में शौचालय तक नहीं है।
सरकार पर दबाव
इस अभियान के तहत, NSUI ने एक व्हाट्सएप नंबर जारी किया है, जहां छात्र, अभिभावक और नागरिक अपने इलाके के स्कूलों की तस्वीरें, वीडियो और समस्याएं साझा कर सकते हैं। इन जानकारियों को एकत्र कर सरकार पर दबाव बनाया जाएगा कि वह शिक्षा बजट का सही उपयोग सुनिश्चित करे।
ले रहे वेतन
चौंकाने वाला उदाहरण देते हुए चौकसे ने कहा कि राजधानी भोपाल के जिस जहांगीरिया स्कूल में देश के पूर्व राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा ने पढ़ाई की थी, आज उसकी छत से प्लास्टर झड़ता है और पूरा फ्लोर बंद पड़ा है। नरसिंहपुर जिले में कई स्कूल ऐसे हैं, जहां 8 वर्षों से छात्र नहीं आए, लेकिन शिक्षक वेतन लेते रहे। रायसेन के चांदबड़ गांव में एक करोड़ रुपए खर्च कर स्कूल भवन बनाया गया, जो 8 साल से बंद पड़ा है।
झूठी ब्रांडिंग
NSUI का कहना है कि प्रदेश में शिक्षा के नाम पर झूठी ब्रांडिंग हो रही है। सांदीपनि स्कूलों के नाम पर टीन की छतों के नीचे बच्चे भीगते हुए पढ़ाई कर रहे हैं। करोड़ों का बजट है लेकिन स्कूल अधूरे हैं, क्लासरूम खाली हैं और बच्चों का भविष्य अधर में है। अभियान का नेतृत्व तनय शर्मा, गगन सिंह और अमन पठान को सौंपा गया है। इस मौके पर विदुषी शर्मा, वंश कनोजिया, नबील असलम और शिवांश तोमर भी मौजूद रहे।
