भोपाल में एनआरआई नर्सिंग कॉलेज और उसके अनुबंधित अरनव अस्पताल में गड़बड़ियों के खिलाफ NSUI ने जोरदार तरीके से आवाज उठाई। संगठन ने आरोप लगाया कि निरीक्षण टीम ने जानबूझकर फर्जी रिपोर्ट तैयार की और कॉलेज को गलत तरीके से क्लीन चिट दिलाई। इसी विरोध में NSUI कार्यकर्ताओं ने सीएमएचओ कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर तत्काल कार्रवाई की मांग की। NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से जुड़ा बड़ा अपराध है। 26 अगस्त को की गई शिकायतों के बाद भी जब नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने कॉलेज को मान्यता दे दी, तब NSUI ने 10 अक्टूबर को विस्तृत शिकायतें सरकार, पुलिस और नर्सेस काउंसिल को भेजीं।
परमार का कहना है कि शिकायतों के बावजूद सीएमएचओ मनीष शर्मा ने निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया और निरीक्षण की समयावधि बीतती रही। इसके बाद 16 अक्टूबर को गठित टीम ने महज एक दिन में रिपोर्ट तैयार कर दी, जिसमें तथ्यों को नज़रअंदाज किया गया।
60% स्टाफ फर्जी
NSUI द्वारा खुद किए गए सत्यापन में कई ऐसे नाम सामने आए जो अरनव अस्पताल में रजिस्टर्ड तो थे, लेकिन वास्तविकता में वे सरकारी अस्पतालों में काम कर रहे थे। कई नर्सों ने लिखित शिकायत देकर साफ कहा कि उन्होंने कभी अरनव अस्पताल में नौकरी नहीं की, लेकिन उनके रजिस्ट्रेशन का अवैध इस्तेमाल किया गया। अस्पताल को 100 बेड का पूर्णत: संचालित दिखाना भी NSUI को संदिग्ध लगा। संगठन ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से अस्पताल प्रबंधन और निरीक्षण टीम के बीच सांठगांठ का नतीजा है।

जिला उपाध्यक्ष अक्षय तोमर ने बताया कि 8 दिसंबर को आई लिखित शिकायतों में स्टाफ ने सीएमएचओ कार्यालय के अधिकारियों पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया है। तोमर का कहना है कि जब इतने गंभीर आरोप सामने आ रहे हों, तो तुरंत निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
NSUI की 5 प्रमुख मांगें
- निरीक्षण टीम के दोनों डॉक्टरों डॉ. रितेश रावत और डॉ. अभिषेक सेन को तत्काल निलंबित किया जाए।
- एक उच्च स्तरीय जांच समिति बनाई जाए।
- एनआरआई नर्सिंग कॉलेज, अरनव अस्पताल प्रबंधन और निरीक्षण टीम पर FIR दर्ज हो।
- निरीक्षण दिवस की CCTV फुटेज और सारे दस्तावेज जब्त कर फॉरेंसिक जांच कराई जाए।
- स्टाफ रजिस्टर और रजिस्ट्रेशन का पूरा ऑडिट किया जाए।
