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गर्भवतियों ने मांगी सड़क, सांसद बोले- डिलीवरी डेट बताओ, पहले ही उठवा लेंगे; मंत्री बोले- क्या डंपर लेकर पहुंच जाएं?

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Published On: 11 July 2025

सीधी | मध्यप्रदेश के सीधी जिले में गर्भवती महिलाओं की सड़क को लेकर उठी आवाज पर बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रिया ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर सक्रिय गर्भवती यूट्यूबर लीला साहू के वीडियो के बाद सड़क निर्माण की मांग पर सांसद और मंत्री के बयान चर्चा में हैं।

सीधी के सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने कहा- “हर डिलीवरी की एक्सपेक्टेड डेट होती है। उसके एक हफ्ते पहले ही उठवा लेंगे।” वहीं, पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने भी तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा- “क्या किसी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाल दी तो हम डंपर लेकर वहां पहुंच जाएं?”

9 महीने की गर्भवती लीला की गुहार

बघेली सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर लीला साहू 9 महीने की गर्भवती हैं। उन्होंने अपने गांव खड्डी खुर्द की जर्जर सड़क को लेकर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें घुटने तक कीचड़ दिख रहा है। लीला ने कहा कि ऐसी हालत में गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचना जोखिम भरा हो जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मदद की गुहार लगाई है।

सांसद का बयान

डॉ. राजेश मिश्रा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा- “अगर लीला साहू की इच्छा है तो वे आकर अस्पताल में भर्ती हो जाएं। सरकार उन्हें भोजन, पानी और बाकी सारी सुविधा देगी। हमारी सरकार किसी की तकलीफ नहीं देख सकती।” उन्होंने कहा कि उस सड़क को लेकर प्रक्रिया चल रही है, लेकिन काम कई बार फॉरेस्ट की आपत्तियों या तकनीकी कारणों से रुक जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार जरूरत पड़ी तो मरीज को हेलिकॉप्टर से भी अस्पताल पहुंचा सकती है।

“सोशल मीडिया में छाना है तो कुछ भी बोलिए”

सांसद यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा, “अगर किसी को सोशल मीडिया में छाना है तो वो कुछ भी कह सकता है। सड़क मैं नहीं बनाता, इंजीनियर बनाता है। उसका डीपीआर बनता है, निविदा निकलती है। दो-तीन साल लगते हैं प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने में।” उन्होंने बताया कि चुरहट और धौनी विधानसभा को जोड़ने वाली यह सड़क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत आती है। इस पर विभाग की तरफ से प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की गई है।

पीडब्ल्यूडी मंत्री बोले

इस मुद्दे पर पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा- “अगर सोशल मीडिया पर किसी ने पोस्ट कर दी, तो क्या हम डंपर और सीमेंट-कंक्रीट प्लांट लेकर वहां पहुंच जाएं? ऐसी हजारों मांगें आती हैं। पीडब्ल्यूडी के पास सीमित बजट है। कौन-सी सड़क बनानी है, यह प्रक्रिया संविधान और कानून के तहत तय होती है।”

“हर विभाग की अपनी सीमाएं होती हैं”

मंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण की जिम्मेदारियां तय हैं। लोगों को कठिनाइयां जरूर होती हैं, लेकिन हर विभाग की अपनी सीमाएं भी हैं। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बजट की कोई कमी नहीं है। सरकार सड़क नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है और प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना से जुड़कर बड़े प्रोजेक्ट आगे ला रही है।

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