MP के नव नियुक्त कर्मचारियों को परिवीक्षा अवधि के दौरान तीन वर्षों तक 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन दिए जाने से जुड़े छह साल पुराने आदेश के विरोध में आज कर्मचारी संगठनों ने बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। राजधानी भोपाल में कर्मचारी संगठन सतपुड़ा भवन के सामने धरना-प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर भी कर्मचारी प्रदर्शन कर कलेक्टरों को मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपेंगे।
तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने बताया कि कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार का ध्यान आकृष्ट करने के लिए यह आंदोलन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि परिवीक्षा काल में कम वेतन की व्यवस्था कर्मचारियों के साथ सीधा अन्याय है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संघ की मांग है कि इस व्यवस्था को तत्काल समाप्त कर पूर्ण वेतन दिया जाए।
भोपाल से विरोध प्रदर्शन
कर्मचारी संगठनों ने अपनी 11 सूत्रीय प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखी हैं। इनमें महंगाई भत्ता और महंगाई राहत का लाभ तत्काल दिए जाने, सीपीसीटी से निजात, परिवीक्षा अवधि में 70-80-90 प्रतिशत वेतन की व्यवस्था खत्म करने, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, लंबे समय से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने, आउटसोर्स और स्थायी संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण तथा ई-अटेंडेंस व्यवस्था से मुक्ति जैसी अहम मांगें शामिल हैं।
संघ के अनुसार यह आंदोलन केवल भोपाल तक सीमित नहीं रहेगा। प्रदेश के सभी जिलों में कर्मचारी एकजुट होकर प्रदर्शन करेंगे और जिला कलेक्टरों के माध्यम से मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपेंगे। इसके जरिए सरकार को यह संदेश दिया जाएगा कि यदि मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
दी चेतावनी
कर्मचारी संगठनों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आगे चरणबद्ध आंदोलन, कार्य बहिष्कार और बड़े स्तर पर प्रदर्शन की रणनीति भी तैयार की जा सकती है।
आंदोलन को सफल बनाने के लिए कर्मचारी नेता मोहन अय्यर, विजय रघुवंशी, उमाशंकर तिवारी, आशुतोष शुक्ला, ओपी सोनी, पवन कुमार मिश्रा, जय विंद सोलंकी, एसएल पंजवानी, अरुण भार्गव सहित अन्य नेताओं ने प्रदेशभर के कर्मचारियों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। नेताओं का कहना है कि एकजुटता से ही कर्मचारियों को उनका हक मिल सकता है।
