रीवा जिला न्यायालय उस वक्त अफरा-तफरी का केंद्र बन गया, जब कोर्ट परिसर को बम से उड़ाने की धमकी सामने आई। यह धमकी किसी फोन कॉल से नहीं, बल्कि सीधे ई-मेल के जरिए भेजी गई, जिससे मामला और भी गंभीर हो गया। सूचना मिलते ही न्यायिक व्यवस्था और प्रशासन दोनों हरकत में आ गए। बताया गया कि यह धमकी जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश मोहन प्रधान के आधिकारिक ई-मेल आईडी पर भेजी गई थी। ई-मेल की भाषा और विषयवस्तु को देखते हुए इसे हल्के में लेने के बजाय तत्काल उच्चस्तरीय सतर्कता बरती गई। न्यायालय प्रशासन ने बिना देरी किए पुलिस को सूचित किया।
धमकी की सूचना मिलते ही सुरक्षा के मद्देनज़र पूरे न्यायालय परिसर को तत्काल खाली करा लिया गया। वकील, कर्मचारी, फरियादी और अन्य मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल दिया गया। कोर्ट के सभी कामकाज को अस्थायी रूप से रोक दिया गया, ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके।
ई-मेल से दहला रीवा
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया। न्यायालय के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया। प्रवेश और निकास मार्गों पर कड़ी निगरानी रखी गई, ताकि कोई भी संदिग्ध गतिविधि न हो सके। मौके पर बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया, जिसने न्यायालय परिसर में सघन तलाशी अभियान शुरू किया। कोर्ट भवन, रिकॉर्ड रूम, पार्किंग क्षेत्र और आसपास के हिस्सों की बारीकी से जांच की गई। हर कोने को खंगाला जा रहा है, ताकि किसी भी तरह का विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु छूट न जाए।
थाना प्रभारी मौजूद
स्थिति की निगरानी स्वयं पुलिस अधीक्षक कर रहे हैं। जिले के सभी थाना प्रभारियों को मौके पर बुलाया गया है। वरिष्ठ अधिकारी पूरे ऑपरेशन की मॉनिटरिंग कर रहे हैं और पल-पल की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। पुलिस ने ई-मेल की तकनीकी जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि धमकी भेजने वाला व्यक्ति या समूह कौन है और उसका उद्देश्य क्या था।
जांच जारी
इस घटना के बाद न्यायालय परिसर और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। जांच पूरी होने और सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही न्यायालय में सामान्य गतिविधियां बहाल की जाएंगी।
