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रीवा यूनिवर्सिटी में पीएचडी परीक्षा विवाद बढ़ा, ABVP ने सौंपा ज्ञापन; दी तालाबंदी की चेतावनी

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Published On: 1 November 2025

रीवा में अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (एपीएसयू) में पीएचडी प्रवेश परीक्षा को लेकर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा। पहले एनएसयूआई ने परीक्षा परिणाम को लेकर विरोध जताया था और अब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) भी मैदान में उतर आई है। एबीवीपी ने शुक्रवार को कुलसचिव को आठ सूत्रीय मांगों वाला ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि अगर तय समय में समाधान नहीं मिला, तो विश्वविद्यालय की तालाबंदी की जाएगी। एबीवीपी ने मांग रखी है कि 150 से ज्यादा छात्रों की आरटीआई का एक सप्ताह के भीतर निराकरण किया जाए और सभी को उनकी उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराई जाएं।

एबीवीपी का कहना है कि पीएचडी प्रवेश परीक्षा के परिणाम में भारी अनियमितताएं हैं। कई छात्रों को गलत अंक दिए गए हैं और कई के नाम परिणाम सूची से गायब हैं। संगठन का आरोप है कि छात्रों ने आरटीआई लगाकर अपनी उत्तर पुस्तिकाएं मांगीं, लेकिन अब तक किसी को कॉपी देखने नहीं दी गई।

जांच की मांग

संगठन ने कहा कि जब तक सभी छात्रों की शंकाएं दूर नहीं होतीं, तब तक प्रवेश प्रक्रिया को रोक दिया जाए। सभी विषयों की कॉपियां दोबारा जांची जाएं और संशोधित परिणाम जारी किया जाए। एबीवीपी नेताओं ने यह भी कहा कि वर्तमान परिणाम पर छात्रों का भरोसा उठ गया है और विश्वविद्यालय प्रशासन को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। एबीवीपी ने परीक्षा प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पेपर सेटिंग में नियमों का उल्लंघन हुआ है और पेपर लीक की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। ज्ञापन में इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की गई है ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके।

छात्रों ने दी आंदोलन की चेतावनी

विश्वविद्यालय इकाई मंत्री दीपा सिंह तोमर ने कहा कि अगर छात्रों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो एबीवीपी को आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने साफ कहा, “अगर प्रशासन ने अनसुनी की, तो छात्र संगठन विश्वविद्यालय का कामकाज ठप कर देगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।” ज्ञापन सौंपने के दौरान एबीवीपी विश्वविद्यालय अध्यक्ष लव पांडेय, रीवा भाग संयोजक पवन द्विवेदी, विभाग छात्रा प्रमुख कृति तिवारी, आर्यन, आदित्य, प्रदीप और कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन छात्रों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे तालाबंदी और धरना प्रदर्शन जैसे कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।

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