सतना में दीपावली के मौके पर शहर के पटाखा कारोबारियों पर खुलेआम वसूली का खेल चल रहा है। जानकारी के मुताबिक मैत्री पार्क क्षेत्र में पटाखा दुकानें खोलने के लिए व्यापारियों से अवैध राशि वसूली जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि जिला प्रशासन के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से यह खेल संभव हो पाया है।
जानकारी के अनुसार, इस बार शहर में 89 पटाखा कारोबारियों को लाइसेंस दिए गए हैं। हर एक व्यापारी से ₹10,000 की राशि वसूली जा रही है। इस राशि के बदले व्यापारियों को टपरानुमा दुकानों के रूप में अनुमति दी जा रही है। दुकानों की वास्तविक कीमत केवल ₹3,000 से ₹4,000 के बीच है। इसका मतलब साफ है कि हर व्यापारी से ₹6,000 से ₹7,000 रुपए सीधे वसूले जा रहे हैं।
मनमानी से परेशान
व्यापारी इस तरीके की मनमानी से परेशान हैं और कह रहे हैं कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और नियमों के खिलाफ है। उनका कहना है कि अगर यह खेल जारी रहा तो छोटे और नए व्यापारी पूरी तरह दब जाएंगे। उन्होंने जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
आर्थिक नुकसान
यह मामला न केवल आर्थिक नुकसान का है, बल्कि व्यापारियों के विश्वास और शहर में व्यापारिक नैतिकता पर भी सवाल उठाता है। व्यापारी उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन इस वसूली के खेल को तुरंत बंद कराए। विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहार के दौरान अवैध वसूली और मनमानी बढ़ जाती है, इसका सीधा असर व्यापारियों और आम जनता दोनों पर पड़ता है। व्यापारियों को चाहिए कि वे ऐसे मामलों में अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं और प्रशासन से जल्द समाधान मांगें।
इस पूरे मामले में यह साफ हो गया है कि सिर्फ लाइसेंस देने के नाम पर व्यापारियों से अतिरिक्त रकम वसूलना गंभीर समस्या बन चुकी है। जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को चाहिए कि वे तुरंत इस खेल को रोकें और सुनिश्चित करें कि आने वाले समय में ऐसा कोई भी व्यापारी परेशान न हो।
