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भोपाल में फिर शुरू हुई खास यूनिट, थायरॉयड कम और बढ़े वजन वालों को मिलेगा फ्री इलाज

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Published On: 19 November 2025

भोपाल में आयुष मंत्रालय और शासकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज की तरफ से चल रही हाइपोथायरायडिज्म और मोटापा विशेषज्ञ यूनिट दोबारा मरीजों के लिए खोल दी गई है। यह वही खास यूनिट है जहां उन लोगों का इलाज होता है जिनका थायरॉयड कम रहता है और दवाएं लेने के बावजूद वजन कम ही नहीं होता। 18 से 60 साल के ऐसे मरीज अब यहां फिर से मुफ्त में इलाज करा सकेंगे।

इस यूनिट की सबसे बड़ी बात यह है कि मरीजों को पंजीयन से लेकर सभी तरह की जांचें, पूरा मूल्यांकन, सलाह और इलाज सबकुछ बिना पैसे के मिलेगा। कई लोग सालों तक एलोपैथिक दवाएं लेते रहते हैं, लेकिन वजन काबू में नहीं आता। ऐसे मरीजों के लिए यह यूनिट काफी राहत वाली साबित हो रही है।

कैसे होगा पंजीयन?

जो भी मरीज इस खास यूनिट का हिस्सा बनना चाहते हैं, उन्हें वीक डे में सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक 0755-2992970 नंबर पर कॉल करना होगा। कॉल पर ही मरीजों का पंजीयन कर दिया जाएगा। पात्रता वही उम्र 18 से 60 साल, हाइपोथायरायडिज्म की पुष्टि, और नियमित थायरोक्सिन जैसी दवाएं लेने के बावजूद वजन न घट पाना। पंजीयन के बाद सारे टेस्ट और इलाज भोपाल स्थित सरकारी होम्योपैथिक चिकित्सालय में ही होंगे। यहां डॉक्टर मरीज का पूरा हेल्थ एनालिसिस करते हैं। मेटाबॉलिज्म, बॉडी टाइप, थायरॉयड की प्रतिक्रिया तक हर चीज देखकर व्यक्तिगत इलाज की प्लानिंग की जाती है। होम्योपैथिक डॉक्टर, डाइटिशियन और लाइफस्टाइल एक्सपर्ट साथ मिलकर ट्रीटमेंट देते हैं।

बाहर से आने वालों के लिए रहने की व्यवस्था भी अगर कोई मरीज भोपाल के बाहर किसी जिले से आता है, तो उसके लिए कॉलेज के कैंपस में ही रहने की पूरी व्यवस्था कर दी जाती है। इलाज के दौरान ठहरने की टेंशन भी खत्म। मरीज को रोजाना की जांच और सेशन के लिए कहीं जाना-आना नहीं पड़ेगा।

पंजीयन के समय कौन-से कागज साथ रखें?

  • पुरानी थायरॉयड रिपोर्ट
  • अभी चल रही दवाओं की सूची
  • पुरानी फाइलें
  • पहले की जांच रिपोर्ट

क्यों खास है यह यूनिट?

थायरॉयड कम होने पर वजन बढ़ना बहुत कॉमन समस्या है, लेकिन काफी लोग दवाएं लेते हुए भी वजन घटा नहीं पाते। यही वजह है कि यह यूनिट देश में अपनी तरह की एक अलग पहल है। यहां सिर्फ दवा नहीं, बल्कि पूरे शरीर की जरूरत के हिसाब से इलाज और लाइफस्टाइल प्लानिंग की जाती है, जिससे वजन और थायरॉयड दोनों पर साथ में काम होता है।

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