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यलो फीवर वैक्सीन की सप्लाई शुरू, MP के यात्रियों को मिली राहत

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Published On: 21 August 2025

भोपाल | विदेश यात्रा की तैयारी कर रहे MP के सैकड़ों लोगों को अब बड़ी राहत मिली है। एम्स भोपाल में यलो फीवर वैक्सीनेशन का काम दोबारा शुरू हो गया है। करीब डेढ़ महीने से वैक्सीन का स्टॉक खत्म होने के कारण प्रदेश के यात्रियों को वीजा संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। अब वैक्सीन मिलने से एजुकेशन, बिजनेस और टूरिज्म वीजा हासिल करने की राह आसान हो गई है।

क्यों जरूरी है यह वैक्सीन

यलो फीवर एक संक्रामक रोग है, जो अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई हिस्सों में पाया जाता है। इन देशों में यात्रा से पहले यलो फीवर वैक्सीनेशन कराना अनिवार्य है। इसके बिना वीजा जारी नहीं होता। एम्स भोपाल प्रदेश का इकलौता अधिकृत केंद्र है, जहां हर महीने औसतन 200 से 250 यात्री टीका लगवाने आते हैं।

वैक्सीन की सप्लाई प्रक्रिया

एम्स प्रशासन के अनुसार, यलो फीवर वैक्सीन विदेशों ब्राजील, फ्रांस और रूस में तैयार होती है। वहां से यह खेप विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के माध्यम से भारत सरकार को दी जाती है। इसके बाद वैक्सीन को हिमाचल प्रदेश के कसौली स्थित केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (सीआरआई) भेजा जाता है। यहां गुणवत्ता जांच पूरी होने के बाद पूरे देश के 63 अधिकृत केंद्रों पर वितरण किया जाता है।

देश में 63 सेंटर

भारत में फिलहाल यलो फीवर टीकाकरण के 63 अधिकृत केंद्र हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में यह सुविधा केवल एम्स भोपाल में उपलब्ध है। वैक्सीन की कमी के कारण यात्रियों को पिछले दिनों महाराष्ट्र या दिल्ली जैसे राज्यों में जाकर टीका लगवाना पड़ रहा था। अब स्टॉक आने से समय और पैसे दोनों की बचत होगी।

टीकाकरण के बाद क्या रखें ध्यान

विशेषज्ञों का कहना है कि यलो फीवर का टीका लगवाने के बाद कम से कम 30 मिनट तक वैक्सीनेशन सेंटर में रुकना जरूरी है। इस दौरान किसी भी तरह की घबराहट, एलर्जी, रैश, सांस लेने में दिक्कत या चक्कर जैसी समस्या हो तो तुरंत ड्यूटी डॉक्टर को सूचित करना चाहिए।

साइड इफेक्ट्स की आशंका

यलो फीवर वैक्सीन से हल्के दुष्प्रभाव आम हैं, जैसे बुखार, सिरदर्द, थकान या इंजेक्शन वाली जगह पर सूजन। ये असर आमतौर पर 3 से 9 दिन के भीतर शुरू होकर एक हफ्ते तक रहते हैं। हालांकि, दुर्लभ मामलों में गंभीर रिएक्शन भी हो सकते हैं।

  • लगभग 55 हजार में से एक व्यक्ति को गंभीर एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है।
  • 1 लाख 25 हजार में से एक में नर्वस सिस्टम पर असर देखा गया है।
  • 2 लाख 50 हजार में से एक में अंग फेल्योर वाली जानलेवा बीमारी का खतरा होता है।
  • 80 लाख में से एक मामले में ब्रेन इंफ्लेमेशन (एन्सेफेलाइटिस) की स्थिति सामने आती है।

यात्रियों को बड़ी राहत

एम्स भोपाल द्वारा वैक्सीनेशन सेवा बहाल किए जाने से अब प्रदेश के यात्रियों को बाहर भटकने की जरूरत नहीं होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से न केवल समय और खर्च बचेगा बल्कि प्रदेश के युवाओं, बिजनेसमैन और टूरिस्ट्स के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा की राह भी सुगम होगी।

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