मध्य प्रदेश में टेलीकॉम सेवाओं को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। संसद में पेश आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जहां निजी कंपनियों ने 5G नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया है, वहीं सरकारी कंपनी बीएसएनएल अब भी प्रदेश के बड़े हिस्से तक अपनी पहुंच नहीं बना सकी है। तकनीकी प्रगति के इस दौर में सरकारी और निजी सेवाओं के बीच का अंतर साफ दिखाई दे रहा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में कुल 54,903 गांव हैं। इनमें से केवल 24,394 गांवों तक ही बीएसएनएल की सेलुलर सेवाएं पहुंच पाई हैं। इसका मतलब है कि करीब 30,509 गांव, यानी लगभग 55.5 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र आज भी बीएसएनएल नेटवर्क से वंचित हैं। अन्य राज्यों की तुलना में यह आंकड़ा काफी कम है। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश (पूर्व) सर्कल में बीएसएनएल 90 प्रतिशत से अधिक गांवों को कवर कर चुका है, जबकि मध्य प्रदेश में यह आंकड़ा आधे से भी कम है।
MP में टेलीकॉम की दो तस्वीरें
संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने संसद में जानकारी दी कि बीएसएनएल देशभर में एक लाख स्वदेशी 4G टावर स्थापित कर रहा है। 15 जनवरी 2026 तक 97,672 साइट्स स्थापित की जा चुकी हैं, जिनमें से 95,511 साइट्स ऑन-एयर हैं। इन टावरों को भविष्य में 5G में अपग्रेड करने की सुविधा भी रहेगी। हालांकि, जमीनी स्तर पर मध्य प्रदेश में इसका असर अभी सीमित दिखाई दे रहा है।
दूसरी ओर, 5G नेटवर्क के विस्तार ने प्रदेश में तेजी से पैर पसारे हैं। मध्य प्रदेश के 27,961 गांवों में 5G सेवा पहुंच चुकी है। यानी प्रदेश के 51 प्रतिशत से अधिक गांव अब हाई-स्पीड इंटरनेट से जुड़ चुके हैं। यह उपलब्धि मध्य प्रदेश को देश में गांवों तक 5G पहुंचाने के मामले में छठे स्थान पर ले आई है।
22 हजार से ज्यादा 5G टावर स्थापित
प्रदेश में अब तक 22,182 5G बीटीएस टावर लगाए जा चुके हैं। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन और ई-गवर्नेंस को मजबूती मिली है।
=जहां एक ओर निजी कंपनियों की आक्रामक रणनीति से प्रदेश डिजिटल क्रांति की ओर बढ़ रहा है, वहीं बीएसएनएल के लिए नेटवर्क विस्तार एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। आने वाले समय में 4G और 5G अपग्रेड योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से ही सरकारी सेवा की साख मजबूत हो पाएगी।
