MP विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आयोग की यह कवायद पारदर्शिता से दूर है और इससे कमजोर वर्गों के लाखों वोटर सूची से गायब हो सकते हैं। सिंघार ने तंज कसते हुए कहा कि SIR का मतलब अब Special Revision नहीं, बल्कि Selective Intensive Removal बन गया है। उन्होंने कहा कि आयोग ने 12 राज्यों में यह प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन क्यों सिर्फ इन राज्यों को चुना गया, इसका कोई साफ कारण नहीं बताया गया।
30 दिन में 51 करोड़ वोटर गिनती
उमंग सिंघार ने कहा कि 27 अक्टूबर को आयोग ने SIR के दूसरे चरण की घोषणा की, जिसके तहत 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक सिर्फ 30 दिनों में 51 करोड़ मतदाताओं की घर-घर गिनती पूरी करने की बात कही गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी प्रक्रिया इतने कम समय में कैसे संभव है कि यह तो या तो आंकड़ों से खेलने का तरीका है या फिर किसी नीतिगत जल्दबाज़ी का परिणाम। उन्होंने कहा कि असम को SIR से बाहर रखना भी सवाल खड़ा करता है। NRC का बहाना लेकर असम को छोड़ दिया गया, जबकि यह दोनों प्रक्रियाएं अलग हैं। यह सीधा पक्षपात दिखाता है।
प्रवासी वोटरों पर असर
सिंघार ने बताया कि मध्यप्रदेश की करीब 22% आबादी आदिवासी है, जिनमें ज्यादातर लोग दूर-दराज के इलाकों में रहते हैं। उन्होंने कहा कि आयोग ने जिन 13 दस्तावेजों की सूची दी है, उनमें ‘वन अधिकार पत्र’ भी शामिल है, लेकिन सरकार ने तीन लाख से ज्यादा दावे पहले ही खारिज कर दिए। ऐसे में हजारों आदिवासी अपने वोट से हाथ धो सकते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रदेश के 25 लाख प्रवासी मजदूरों की मौजूदगी दर्ज नहीं हो पाएगी और उनका नाम आसानी से सूची से हट सकता है।
मध्यप्रदेश की 22% आबादी आदिवासी है।
लाखों आदिवासी आज भी जंगलों, पहाड़ों और दूरदराज़ इलाकों में रहते हैं जहाँ न इंटरनेट है, न कम्प्यूटर, और न ही दस्तावेज़ों की समझ हैं । तो क्या भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश में आदिवासी वोट काटने की तैयारी कर रही है?
वन अधिकार से वंचित कर दिए गए… pic.twitter.com/Xm3O0G40A4
— Umang Singhar (@UmangSinghar) October 29, 2025
पुराने सवालों के जवाब अब तक नहीं
सिंघार ने याद दिलाया कि उन्होंने 19 अगस्त 2025 को वोट चोरी का मामला उठाया था, जिसमें बताया गया था कि दो महीनों में 16 लाख नए नाम मतदाता सूची में जोड़े गए, लेकिन आज तक चुनाव आयोग ने इसका कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि जब पुरानी गड़बड़ियों पर जवाब नहीं मिला, तो अब इस नए SIR पर भरोसा कैसे किया जाए? सिंघार ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया मतदाता सूची की सफाई के नाम पर लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करने की साजिश लगती है।
आयोग से सवाल
- अगर सब ठीक है, तो बिहार SIR में हटाए गए नामों की असली संख्या क्यों नहीं बताई जा रही?
- 12 राज्यों के चयन का मानदंड क्या था?
- और जनगणना शुरू होने से पहले इतनी जल्दबाज़ी क्यों?”
