भोपाल के पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित मानस भवन के पीछे बसी झुग्गी बस्ती में सोमवार सुबह बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई होनी थी। 27 परिवारों को हटाने के लिए तैयारी पूरी थी, लेकिन ऐन मौके पर पूरी प्रक्रिया रोक दी गई। रविवार को कांग्रेस के विरोध के बाद सोमवार की सुबह कार्रवाई स्थगित होने की खबर सामने आई, जिससे इलाके में चर्चा तेज हो गई। शहर वृत एसडीएम दीपक पांडे का कहना है कि पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध नहीं होने के कारण कार्रवाई टालनी पड़ी। प्रशासन का दावा है कि यह केवल अस्थायी रोक है और जल्द ही कार्रवाई की नई तारीख तय की जाएगी। हालांकि, स्थानीय स्तर पर इसे राजनीतिक दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
इस पूरे मामले में कांग्रेस की सक्रियता ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दीं। रविवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी झुग्गी बस्ती पहुंचे, लोगों से सीधे बातचीत की और कार्रवाई का विरोध किया। इसके बाद मामला सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक टकराव में बदल गया।
प्रशासन की तैयारी
कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन ने भारी अमला तैनात किया था। अपर कलेक्टर अंकुर मेश्राम के निर्देश पर 101 अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी, जिनमें एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारी शामिल थे। यह साल की आखिरी बड़ी अतिक्रमण कार्रवाई मानी जा रही थी। मानस भवन के पीछे खसरा नंबर 1413/1 की जमीन पर बने अतिक्रमण को हटाया जाना था। यह 31.5130 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली वन भूमि का हिस्सा बताया गया है। प्रशासन इससे पहले हथाईखेड़ा इलाके में भी बेशकीमती सरकारी जमीन से कब्जा हटवा चुका है।
कांग्रेस का सीधा टकराव
इस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस नेताओं ने खुलकर सवाल उठाए। जीतू पटवारी ने मौके से ही अफसरों को फोन कर चेतावनी दी कि अगर एक भी ईंट हटाई गई तो कांग्रेस सड़कों पर उतरेगी। यह बयान सोशल और राजनीतिक हलकों में तेजी से फैल गया। झुग्गी बस्ती में रहने वाले लोगों का कहना है कि वे यहां करीब 60-70 साल से रह रहे हैं। आदिवासी महिलाओं ने पटवारी को बताया कि कर्ज लेकर छोटे-छोटे घर बनाए गए हैं और अब अचानक बेदखली का नोटिस मिला है। बस्ती में 27 परिवारों के करीब 200 लोग रहते हैं।
लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में,
मोहन बाबू तरस नहीं खाते बस्तियां उजाड़ने में !!📍मानस भवन क्षेत्र, भोपाल. pic.twitter.com/Ta3slh0p0l
— MP Congress (@INCMP) December 29, 2025
शिफ्टिंग का प्लान
प्रशासन का कहना है कि परिवारों को भौंरी, कलखेड़ा और मालीखेड़ी में बने आवासों में शिफ्ट किया जाएगा। ये मकान मुफ्त दिए जाएंगे और प्रति परिवार करीब 2 लाख की लागत मानस भवन प्रबंधन उठाएगा। बावजूद इसके, बस्ती के लोग आशंकित हैं।
