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जनवरी की डेडलाइन और प्रमोशन का खतरा, अफसरों की संपत्ति पर MP सरकार की सख्ती

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Published On: 1 January 2026

साल 2025 के खत्म होते ही MP के प्रशासनिक अमले के लिए नए साल की शुरुआत एक सख्त निर्देश के साथ हुई है। राज्य में पदस्थ सभी आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों को अब अपनी अचल संपत्ति का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य कर दिया गया है। यह प्रक्रिया औपचारिक नहीं, बल्कि करियर से सीधे जुड़ी मानी जा रही है, क्योंकि समय पर जानकारी नहीं देने पर इसका असर पदोन्नति पर पड़ सकता है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि अधिकारियों को 1 जनवरी से 31 जनवरी 2026 के बीच SPARROW पोर्टल पर अपनी संपत्ति की जानकारी ऑनलाइन अपलोड करनी होगी। यह विवरण 1 जनवरी 2026 की स्थिति के अनुसार तैयार किया जाएगा। यानी देश या विदेश में मौजूद हर अचल संपत्ति को इस रिकॉर्ड में शामिल करना होगा।

MP की कार्रवाई

डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ट्रेनिंग (DoPT) के निर्देश मिलने के बाद राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने इस आदेश को लागू किया है। अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम 1968 के तहत हर अधिकारी के लिए यह वार्षिक प्रक्रिया अनिवार्य है। सरकार का कहना है कि इससे प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। जीएडी के आदेश में साफ लिखा है कि यदि कोई अधिकारी तय समय सीमा में IPR दाखिल नहीं करता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इतना ही नहीं, गोपनीय रिपोर्ट और प्रमोशन जैसे अहम मामलों में भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसी कारण विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों से हर हाल में IPR भरवाना सुनिश्चित करें।

अचल संपत्ति होगी बतानी

आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों को न सिर्फ अपनी, बल्कि पत्नी या पति के नाम दर्ज अचल संपत्तियों का भी पूरा विवरण देना होगा। इसमें भारत के साथ-साथ विदेशों में मौजूद जमीन, मकान या अन्य स्थायी संपत्तियां भी शामिल हैं। सरकार इसे वित्तीय पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम मान रही है। केवल शीर्ष अधिकारी ही नहीं, बल्कि मंत्रालय में पदस्थ तृतीय श्रेणी कर्मचारियों, सहायक अनुभाग अधिकारियों, सहायक ग्रेड-2 और 3, निज सहायकों, स्टेनो, तकनीकी संवर्ग और मंत्री स्टाफ को भी 31 जनवरी तक अपनी संपत्ति का ब्योरा देना होगा। हालांकि उप सचिव और अपर सचिव स्तर के अधिकारियों को लेकर इस आदेश में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।

सरकार का मानना है कि संपत्ति विवरण को ऑनलाइन और समयबद्ध करने से व्यवस्था ज्यादा साफ-सुथरी बनेगी। नए साल में यह आदेश अफसरों के लिए एक चेतावनी भी है कि नियमों की अनदेखी अब सीधे कार्रवाई और करियर पर असर डाल सकती है।

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