भोपाल के निशातपुरा इलाके की अमन कॉलोनी रविवार को अचानक सुर्खियों में आ गई, जब पुलिस पर ही हमला कर दिया गया। यह इलाका ईरानी डेरे के नाम से जाना जाता है, जहां रहने वाले कई लोग देशभर में लूट, चोरी और ठगी की वारदातों के लिए पहले से कुख्यात रहे हैं। पुलिस यहां एक पुराने केस की गिरफ्तारी के लिए पहुंची थी, लेकिन माहौल पल भर में तनावपूर्ण हो गया।
पुलिस की रेड का मकसद ईरानी डेरे के सरगना राजू ईरानी को पकड़ना था। आरोप है कि उसने सागर जिले के एक सर्राफा कारोबारी को खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर ठगा था। जैसे ही पुलिस टीम अमन कॉलोनी पहुंची, वहां मौजूद लोगों ने विरोध शुरू कर दिया और बात हाथापाई तक पहुंच गई।
चौंकाने वाला कबूलनामा
हमले के बाद पुलिस ने काला ईरानी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने चौंकाने वाले खुलासे किए। आरोपी ने माना कि वह कभी सीबीआई अधिकारी तो कभी पत्रकार बनकर लोगों को झांसे में लेता था। छापेमारी के दौरान उसके घर से एक न्यूज चैनल की माइक आईडी भी बरामद हुई, जिससे साफ है कि फर्जी पहचान इस गिरोह का पुराना हथकंडा है। ईरानी डेरे का नेटवर्क सिर्फ ठगी तक सीमित नहीं है। 20 दिसंबर 2025 को हबीबगंज थाना क्षेत्र में रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के पास एक वेटरनरी डॉक्टर से मोबाइल लूट की घटना ने पुलिस को चौंका दिया। भागते समय लुटेरों की बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई और दोनों आरोपी पकड़ लिए गए।
मुंबई से दुबई तक फैला मोबाइल रैकेट
गिरफ्तार लुटेरों अली हसन और मो. अली ने पूछताछ में बताया कि वे महंगे मोबाइल फोन लूटकर मुंबई भेजते थे। वहां से यह फोन आगे दुबई पहुंचा दिए जाते थे। दोनों आरोपी भी अमन कॉलोनी के ही रहने वाले हैं। पुलिस को शक है कि इस नेटवर्क में कई और नाम शामिल हो सकते हैं। इस गिरोह की पहुंच सिर्फ भोपाल तक नहीं रही। जुलाई महीने में दिल्ली पुलिस ने अमन कॉलोनी से जुड़े दो बदमाशों मुर्तजा अली उर्फ दमार और सिराज अली को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था। इंद्रप्रस्थ पार्क के पास घेराबंदी के दौरान दोनों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी थी।
देशभर में दर्ज हैं संगीन अपराध
जांच में सामने आया कि ये दोनों आरोपी हत्या के प्रयास, लूट, चोरी और ठगी जैसे कई मामलों में देश के अलग-अलग राज्यों में वांछित थे। दिल्ली पुलिस ने इनके खिलाफ नया मामला दर्ज किया था। अब भोपाल पुलिस ईरानी डेरे से जुड़े पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। सवाल यही है कि अमन कॉलोनी की गलियों में और कितने ऐसे चेहरे छिपे हैं, जो फर्जी पहचान के सहारे देश और विदेश तक अपराध का जाल फैला रहे हैं।
