मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में बुरहानपुर जिले के ग्राम टिटगाँवकलां के युवा प्रतीक पाटील की कहानी प्रेरणादायक है। प्रतीक अपने पिता के साथ खेती का काम करते हैं और मुख्य फसलें जैसे केला, चना, मक्का, गन्ना, सोयाबीन, तुअर, गेहूँ, प्याज उगाते हैं।
प्रतीक ने देखा कि गांव में समय पर ट्रेक्टर और आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध न होने से खेती प्रभावित होती है। उन्होंने तय किया कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके अपनी और अन्य किसानों की खेती को सरल और उत्पादक बनाया जाए। इस सोच ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित किया।
बुरहानपुर: कस्टम हायरिंग योजना से मिला अवसर
प्रतीक को कृषि अभियांत्रिकी विभाग की निजी कस्टम हायरिंग स्कीम के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने ऑनलाइन आवेदन किया और कंप्यूटराइज्ड लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से चयनित हुए। योजना के तहत उन्हें करीब 20.5 लाख रुपए की परियोजना लागत पर ऋण स्वीकृत हुआ।
अक्टूबर 2025 में प्रतीक ने ‘‘गुरूकृपा कस्टम हायरिंग केन्द्र’’ स्थापित किया। केंद्र में उन्होंने ट्रेक्टर, कल्टीवेटर, रोटावेटर, मल्चिंग मशीन, मल्टिक्रोप थ्रेशर, चापकटर और सीडकम फर्टिलाइज़र जैसे आधुनिक कृषि यंत्र खरीदे। अब वे अपने गांव और आसपास के लगभग 40 किसानों को किराए पर ये यंत्र उपलब्ध कराते हैं।
कृषि में रोजगार और लाभ
बीते दो महीनों में प्रतीक ने 2.6 लाख रुपए से अधिक का कार्य किया। केंद्र से न केवल प्रतीक को लाभ मिला है बल्कि क्षेत्र के किसानों को भी उत्पादन और समय की बचत में मदद मिली है। प्रतीक पाटील कहते हैं कि यह योजना ग्रामीण युवाओं को खेती से जोड़कर आत्मनिर्भर भारत की नींव मजबूत करती है।
मध्यप्रदेश में निजी कस्टम हायरिंग योजना 2012-13 से संचालित है। इसका उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को उचित दर पर कृषि उपकरण उपलब्ध कराना, उत्पादन बढ़ाना और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार सृजित करना है। योजना में ऑनलाइन आवेदन और कंप्यूटराइज्ड लॉटरी के माध्यम से चयन होता है, और आवेदन हेतु भूमि के कागजात, 12वी पास, आयु, जाति प्रमाणपत्र और आधार कार्ड आवश्यक हैं।
