ग्वालियर व्यापार मेला इस बार सिर्फ खरीदारी और मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा। मेले के बीचों-बीच बना भव्य राम मंदिर लोगों को ठहरकर देखने और नतमस्तक होने पर मजबूर कर रहा है। जैसे ही मंदिर का शुभारंभ हुआ, वैसे ही श्रद्धालुओं और सैलानियों की भीड़ यहां उमड़ने लगी। मेला घूमने आए लोग अब इसे केवल प्रदर्शनी नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव के रूप में देख रहे हैं। इस राम मंदिर को आकार देने का जिम्मा बंगाल से आए 17 कुशल कलाकारों ने संभाला। करीब 33 दिनों तक लगातार मेहनत कर उन्होंने इस संरचना को खड़ा किया।
पीले रंग में तैयार यह मंदिर अपनी बनावट, नक्काशी और डिजाइन में अयोध्या के राम मंदिर की झलक साफ दिखाता है। दूर से देखने पर यह अस्थायी ढांचा कम और स्थायी पत्थर का मंदिर ज्यादा प्रतीत होता है।
ग्वालियर में रामलला की मनमोहक प्रतिमा
मंदिर के गर्भगृह में विराजमान प्रभु श्रीराम की प्रतिमा श्रद्धालुओं को भावनात्मक रूप से जोड़ रही है। लगभग 5 फीट ऊंची यह प्रतिमा पूरी तरह मिट्टी से बनी है, जिसे भोपाल के कलाकारों ने विशेष रूप से तैयार किया है। रामलला के चेहरे पर सौम्यता, करुणा और तेज का ऐसा संतुलन है कि दर्शन करते ही लोगों की आंखें नम हो जाती हैं। मंदिर में गणेश जी और हनुमान जी की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं।
मंदिर को केवल देखने की वस्तु न बनाकर एक जीवंत धार्मिक स्थल का स्वरूप दिया गया है। यहां विशेष रूप से पुजारी की नियुक्ति की गई है। सुबह और शाम नियमित आरती होती है। आरती के समय पूरा परिसर भजन-कीर्तन और जयकारों से गूंज उठता है, जिससे मेले का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है।
75 फीट ऊंचा मंदिर
मेला मैदान में खड़ा यह मंदिर अपने विशाल आकार के कारण भी चर्चा में है। मंदिर की लंबाई 75 फीट, चौड़ाई 60 फीट और ऊंचाई भी 75 फीट रखी गई है। लकड़ी, कपड़े और थर्माकोल से बनी संरचना को इस तरह सजाया गया है कि वह पत्थर के भव्य मंदिर जैसा आभास देती है। संतुलन और डिजाइन इसे और प्रभावशाली बनाते हैं। दर्शन के लिए आई महिला श्रद्धालु लक्ष्मी ने बताया कि वह कभी अयोध्या नहीं जा सकीं, लेकिन इस मंदिर में आकर उन्हें वही अनुभूति हो रही है। मंदिर के पुजारी दीपक शर्मा ने बताया कि रामलला की प्रतिमा और पूरा स्वरूप अयोध्या मंदिर की तर्ज पर ही तैयार किया गया है।
मंदिर के आर्किटेक्ट संदीप उमरेकर का कहना है कि हर साल मेला कुछ नया मांगता है। इस बार उन्होंने उन लोगों के लिए यह मंदिर बनवाया, जो अब तक अयोध्या नहीं जा पाए। उनका उद्देश्य यही था कि ग्वालियर में ही लोगों को रामलला के दर्शन का वही भाव और अनुभव मिल सके।
