दिवाली का त्योहार खुशी और रोशनी लेकर आया, लेकिन शहरवासियों के लिए हवा का हाल अभी भी चिंता का विषय है। इस बार ग्वालियर में ध्वनि और वायु प्रदूषण पिछले साल की तुलना में थोड़ा कम रहा, लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से कई इलाकों में स्थिति खतरनाक बनी हुई है। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) की वेबसाइट पर उपलब्ध एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के आंकड़े बताते हैं कि महाराज बाड़ा और डीडी नगर जैसे इलाकों में हवा की गुणवत्ता बहुत खराब बनी हुई है।
AQI के हालात
महाराज बाड़ा में AQI 255 और डीडी नगर में 248 रिकॉर्ड किया गया, जबकि सिटी सेंटर में यह 131 रहा। 20 अक्टूबर की दिवाली की रात से लेकर अगले दिन सुबह तक बोर्ड ने शहर के अलग-अलग तीन स्थानों पर 6 घंटे की मॉनिटरिंग की। आंकड़ों के अनुसार, दिवाली के दिन पटाखों की वजह से हवा में प्रदूषण बढ़ा, लेकिन ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल के कारण यह पिछले दो साल की तुलना में कम हुआ।
MPPCB के अधिकारियों ने बताया कि महाराज बाड़ा, विश्वविद्यालय और दीनदयाल नगर क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर पिछले सालों की तुलना में थोड़ा कम रहा। इसके बावजूद देर रात तक पटाखे चलने और धूल उड़ने की वजह से हवा कुछ जगहों पर जहरीली बनी रही।
क्यों है हवा खतरनाक?
शहर में वाहन प्रदूषण हमेशा मौजूद रहता है, लेकिन महाराज बाड़ा व्यवसायिक इलाका है, जहाँ अधिक ट्रैफिक और आतिशबाजी की वजह से हवा की गुणवत्ता ज्यादा खराब रहती है। वहीं डीडी नगर एक रिहायशी इलाका है, लेकिन यहाँ लगातार कंस्ट्रक्शन और खदान गतिविधियों के कारण हवा हमेशा खराब, बहुत खराब या जानलेवा स्तर की रहती है। MPPCB ने बताया कि पिछले साल भी दिवाली के दूसरे दिन डीडी नगर में AQI खतरनाक स्तर पर था। इस बार हवा की गुणवत्ता थोड़ी सुधरी है, लेकिन अभी भी स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है।
बारिश और धूल का असर
ग्वालियर में इस समय हालात को और खराब करने वाला एक कारण सड़कों की उखड़ी हालत और धूल भी है। बारिश के बाद कई सड़कें और निर्माण स्थल उखड़ गए हैं। धूल के कण और आतिशबाजी का धुआं मिलकर हवा में मिल गया, जिससे AQI को और ऊपर धकेल दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि दिवाली के दिन पटाखों से निकलने वाला धुआं PM2.5 और PM10 कणों से भरा होता है। यह कण श्वसन तंत्र को सीधे प्रभावित करता है। महाराज बाड़ा और डीडी नगर जैसे इलाकों में यह समस्या ज्यादा गंभीर बन जाती है, क्योंकि यहाँ धूल और धुआं मिलकर जहरीली हवा का निर्माण करते हैं।
ग्रीन पटाखों ने कुछ हद तक कम किया असर
इस बार ग्वालियर में ग्रीन पटाखों पर जोर देने का असर देखा गया। MPPCB के अधिकारियों ने कहा कि पिछले साल की तुलना में हवा का प्रदूषण कम हुआ है, लेकिन शहरवासियों को अभी भी मास्क पहनने और बाहर कम रहने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि दिवाली और अन्य त्योहारों के दौरान शहर में वाहन कम करने, धूल मिट्टी पर काबू पाने और ग्रीन पटाखे इस्तेमाल करने से AQI को नियंत्रित किया जा सकता है।
AQI के 3 साल के आंकड़े
| स्थान | साल 2023 | साल 2024 | साल 2025 |
|---|---|---|---|
| डीडी नगर | 412 | 407 | 248 |
| महाराज बाड़ा | 384 | 326 | 255 |
| सिटी सेंटर | 357 | 277 | 131 |
