मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ (ई-कोर्ट) ने आयकर अपीलीय अधिकरण के आदेश के खिलाफ दायर अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। न्यायालय ने मामले में छह अहम विधिक प्रश्न तय करते हुए इसे अंतिम सुनवाई के लिए 10 मार्च को सूचीबद्ध किया है। यह मामला अनूप निगम बनाम आयकर अधिकारी 3(1) ग्वालियर से जुड़ा है, जिसमें अपीलकर्ता ने आयकर अधिनियम की धारा 260ए के तहत चुनौती पेश की है।
अपील में बताया गया है कि आयकर अपीलीय अधिकरण की आगरा पीठ ने 11 फरवरी 2025 को पारित आदेश में अपील को आंशिक रूप से स्वीकार किया था। हालांकि अधिकरण ने एक नए मुद्दे पर विचार करते हुए प्रकरण को पुनः मूल्यांकन अधिकारी (एओ) के पास भेजने का निर्देश दिया। अपीलकर्ता का तर्क है कि यह कदम अधिकार क्षेत्र से परे है और विधिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।
ग्वालियर खंडपीठ
खंडपीठ ने जिन सवालों को सुनवाई योग्य माना है, उनमें यह भी शामिल है कि क्या आईटीएटी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नया मुद्दा खड़ा कर सकता है। साथ ही, वर्ष 2011-12 के मामले को दोबारा खोलना क्या वैधानिक समय-सीमा के विपरीत है। एक अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि विभाग की ओर से कोई विशेष प्रार्थना न होने के बावजूद अधिकरण ऐसा निर्देश दे सकता था या नहीं। इन बिंदुओं पर विस्तृत कानूनी बहस की संभावना है।
रजिस्ट्री राशि को लेकर विवाद
मामले की जड़ एक संपत्ति रजिस्ट्री से जुड़ी है। रिकॉर्ड के अनुसार अनूप निगम के नाम से 3 करोड़ रुपए की रजिस्ट्री की सूचना आयकर विभाग को मिली थी, जिसके आधार पर नोटिस जारी किया गया। अपीलकर्ता का कहना है कि वास्तविक रजिस्ट्री 30 लाख रुपए की थी और इसे वर्ष 2011-12 के मूल्यांकन में पहले ही दर्शाया जा चुका है। अब अदालत में यही तथ्य और कानूनी पहलू केंद्र में रहेंगे।
10 मार्च को तय होगी अगली दिशा
10 मार्च को होने वाली अंतिम सुनवाई में अदालत इन विधिक प्रश्नों पर विस्तार से विचार करेगी। इस फैसले का असर न केवल संबंधित पक्षों पर, बल्कि आयकर मामलों में अधिकार क्षेत्र और पुनर्मूल्यांकन की सीमाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
